
Putin Birthday: मैदान छोड़ती सेना, भागते युवा, घिरते पुतिन... 70वें बर्थ डे पर जीवन के सबसे मुश्किल दौर में रूसी राष्ट्रपति!
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज अपने 70वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं. लेकिन ये जश्न का मौका उस समय आया है जब यूक्रेन की जंग में रूस की सेनाएं पिछड़ रही हैं, सेना में भर्ती से बचने के लिए रूसी युवा देश छोड़कर भाग रहे हैं, सबसे बड़ी बात ये है कि रूस की जनता राष्ट्रवाद का पुतिन का वर्जन सुनने को तैयार नहीं है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं. बर्थडे ब्वॉय पुतिन आज अपने जीवन के उस पड़ाव पर हैं जहां उनकी राष्ट्र नायक की छवि जनता के लिए ज्यादा मायने नहीं रखती है. रूस में महंगाई दर रिकॉर्ड तोड़ रही है, यूक्रेन के साथ जंग निर्णायक स्थिति में पहुंच नहीं पा रही है. युवा सेना में भर्ती होने से बचने के लिए देश छोड़कर भाग रहे हैं. लगभग 225 दिनों तक खींच चुका ये युद्ध पुतिन की लोकप्रियता पर भारी पड़ रहा है.
अतंरराष्ट्रीय मंच पर पुतिन अमेरिका और यूरोप के निशाने पर हैं. उनपर विश्व शांति को खतरे में डालने का आरोप लग रहा है. आलोचकों के अनुसार पुतिन यूक्रेन पर हमले को दुनिया की पंचायत में तर्कसंगत साबित नहीं कर पा रहे हैं. उनके सैनिक मारे जा रहे हैं, सेना विद्रोह कर रही है. वहीं घरेलू मोर्चे पर रूस की इकोनॉमी सिकुड़ रही है. अगस्त में दूसरी तिमाही में रूस की अर्थव्यवस्था में 4 फीसदी की दर से गिरावट दर्ज की गई है. कहा जा सकता है पुतिन अपने 2 दशक से ज्यादा के राजनीतिक दौर में सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं.
7 अक्टूबर 1952 को जन्मे पुतिन ने 24 फरवरी 2022 को जब यूक्रेन के खिलाफ अपनी सेना भेजी थी तब आलोचकों ने कहा था कि USSR को येन-केन प्रकारेण फिर से दुनिया के नक्शे पर देखना चाहते हैं. वो USSR जो 1991 में बिखरकर खंड खंड हो गया था. तब कई रूसी राष्ट्रवादियों और दक्षिणपंथियों ने पुतिन के इस कदम का समर्थन किया था.
आखिरकार पुतिन इससे पहले चेचेन्या, जॉर्जिया और क्रीमिया को रूस में शामिल करा चुके थे. पुतिन ने फरवरी में ही यूक्रेन का हिस्सा रहे लुहान्सक और दोनेत्स्क को स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी थी.
यूक्रेन में चुनौतियों से घिरे बर्थडे ब्वॉय पुतिन
इसी साल फरवरी में जब पुतिन ने यूक्रेन पर हमला किया तो लोगों को लगा नहीं था कि एक महाशक्ति के सामने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का नेतृत्व ज्यादा दिनों तक टिक पाएगा. रूस और पुतिन के जनरलों को उम्मीद थी कि कमजोर यूक्रेन उनकी सैन्य शक्ति के सामने कुछेक दिनों में घुटने टेक देगा और उनका सैन्य अभियान अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर लेगा.

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