
Pankaj Udhas Death: हनुमान चालीसा पढ़़कर गाना शुरू करते थे पंकज उधास, विदेशी भी रहे गजल सिंंगर के फैन
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क्या आप जानते हैं कैसेट्स के दौर में जब सीडीज लॉन्च हुए तो उसे पंकज की आवाज से ही जारी किया गया था. साल 1987 में म्यूजिक इंडिया ने शगुफ्ता नाम का सीडी एल्बम लॉन्च किया था. इसके बाद सिंगर ने सोनी टीवी पर एक शो आदाब अर्ज है भी शुरू किया. जानें दिवंगत सिंगर पंकज के बारे ऐसे ही कुछ अनसुने किस्से, जो हम आपके लिए लेकर आए हैं...
दिग्गज कलाकार पंकज उधास की जिंदगी के पन्नों को अगर पलटा जाए तो आपको हर पल सिर्फ हैरानी ही हाथ लगेगी. इतनी कहानियां हैं कि आप सिर्फ और सिर्फ पढ़ते ही चले जाएंगे. पंकज ने 72 की उम्र में आखिरी सांस ली. 26 फरवरी को लंब बीमारी से उनका निधन हो गया. लेकिन उनकी आवाज अमर रहेगी. वहीं उनके किस्से भी हमेशा दोहराए जाएंगे.
क्या आप जानते हैं कैसेट्स के दौर में जब सीडीज लॉन्च हुए तो उसे पंकज की आवाज से ही जारी किया गया था. साल 1987 में म्यूजिक इंडिया ने शगुफ्ता नाम का सीडी एल्बम लॉन्च किया था. इसके बाद सिंगर ने सोनी टीवी पर एक शो आदाब अर्ज है भी शुरू किया. जानें दिवंगत सिंगर पंकज के बारे ऐसे ही कुछ अनसुने किस्से, जो हम आपके लिए लेकर आए हैं...
अफगानी ड्राइवर निकला गजल किंग का फैन स्टेज प्रोग्राम्स के लिए मशहूर पंकड एक बार न्यूयॉर्क में शो कर रहे थे. फेमस जगह मैडिसन स्क्वेर में इनका स्टेज प्रोग्राम था. शो खत्म करने के बाद पंकज ने एयरपोर्ट जाने के लिए टैक्सी ली. पंकज को एयरपोर्ट के लिए देरी हो रही थी तो उन्होंने टैक्सी वाले से गाड़ी थोड़ी तेज चलाने को कहा. इस पर ड्राइवर ने पलटकर जवाब में पंकज की ही गजल की लाइन गुनगुना दी, 'जरा आहिस्ता चल.' तो पंकज ने कहा, 'भाई लगते तो गोरे हो, हिंदी जानते हो?' उसने बताया कि वह अफगानी है लेकिन उनका जबरदस्त फैन है. फैन ने बताया कि वो रात भर गजल सुनने के लिए टैक्सी लगाकर बैठा रहता है. इसके बाद ड्राइवर ने पंकज को एयरपोर्ट छोड़ा और सिंगर से गले मिला. पंकज ने बताया था कि उसने टैक्सी का किराया भी नहीं लिया.
पंकज का हनुमान चालीसा कनेक्शन
पंकज बेहद स्प्रिचुअल रहे हैं. एक शो के दौरान उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि बजरंगी बली को कितना मानते हैं. उनका ये नियम रहा कि वो हमेशा शो शुरू करने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करते थे. ऐसा करके उन्हें सुकून मिलता था, इसके बाद वो लगातार कितनी भी देर गा लेते थे. पंकज ने इसी के साथ कहा था कि गाते गाते मुझे इतना अनुभव हो चुका है कि किस राज्य के, किस क्षेत्र के श्रोता किस तरह का गाना पसंद करेंगे. इसलिए उनके मूड के अनुसार मैं गानों का ट्रैक बदल देता हूं.
पंकज उधास भले ही अब दुनिया में नहीं लेकिन उनकी आवाज हमेशा दिल को सुकून देती रहेगी. एक कलाकार दुनिया को जरूर अलविदा कहता है लेकिन उसकी कला जिंदा रहती है. पंकज जी को ये दुनिया हमेशा याद रखेगी.

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