
OPS की मांग पर विपक्ष अड़ा, अब मोदी सरकार का ये प्लान, बस इस कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार!
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मौजूदा पेंशन में कर्मचारियों को अंतिम वेतन का करीब 38 फीसदी पेंशन मिलती है. अगर सरकार 40 फीसदी सुनिश्चित करती है तो 2 फीसदी का बोझ सरकारी खजाने पर पड़ने वाला है.
पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) अब चुनावी मुद्दा बन गया है. खासकर गैर-बीजेपी शासित राज्यों में इसे जोर-शोर से उठाया रहा है. जिसके बाद केंद्र सरकार ने नई पेंशन स्कीम (NPS) के रिव्यू के लिए एक कमेटी गठित की है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार कर्मचारियों को मिनिमम एश्योर्ड पेंशन की गारंटी देने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में बदलाव कर सकती है. इस बीच वित्त मंत्रालय ने ट्वीट कर बताया है कि गठित कमेटी संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया में है, और अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है.
This is in reference to a news report carried in various news papers, purporting to give details of certain specific percentage of pension being proposed by the Government for the employees under National Pension System #NPS. This news report is false. The Committee, set up…
रिपोर्ट की मानें तो केंद्र सरकार NPS के नियमों में बदलाव करके कर्मचारियों को 40% से 45% एश्योर्ड मिनिमम पेंशन देने के नए फॉर्मूले पर काम कर रही है. यानी इस फॉर्मूले के तहत सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले जो आखिरी सैलरी मिलेगी, उसी के आधार पर कर्मचारियों की मिनिमम पेंशन की राशि तय हो सकती है.
बता दें, इसी साल 24 मार्च को संसद में फाइनेंस बिल पेश करने के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई पेंशन स्कीम के रिव्यू के लिए कमेटी बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद 6 अप्रैल को फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बताया था कि नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) का रिव्यू के लिए कमेटी बना दी गई है. इस कमेटी के रिव्यू के बाद सरकार फैसला लेगी कि पुरानी पेंशन स्कीम को वापस लागू किया जाना चाहिए या नहीं? कमेटी का नेतृत्व वित्त सचिव टीवी सोमनाथन कर रहे हैं.

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