
LIVE: इमरान खान को इस्लामाबाद ला रही पुलिस, HC में बोली PTI- पूर्व पीएम को किडनैप किया
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना केस में 3 साल की सजा सुनाई गई है. साथ ही कोर्ट ने उन पर 5 साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी है. इमरान को उनके लाहौर स्थिति आवास से अरेस्ट कर लिया गया है. अब उन्हें सड़क मार्ग से इस्लामाबाद लाया जा रहा है.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना केस में 3 साल की सजा सुनाई गई है. साथ ही कोर्ट ने उन पर 5 साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी है. इमरान को उनके लाहौर स्थिति आवास से अरेस्ट कर लिया गया है. अब उन्हें सड़क मार्ग से इस्लामाबाद लाया जा रहा है. हालांकि पहले उन्हें हेलिकॉप्टर से लाए जाने की तैयारी की जा रही थीं, लेकिन बाद में इस प्लान को बदला गया है. मौसम खराब होने की वजह से ऐसा किया गया है. उधर, गिरफ्तारी से पहले इमरान ने अपने समर्थकों से कहा कि वह अपने हुकूक के लिए सड़कों पर उतरें, आजादी प्लेट में रखकर नहीं दी जाती, जंजीरें खुद से नहीं टूटतीं, तोड़नी पड़ती हैं, हालांकि इस्लामाबाद में अभी तक किसी तरह की कोई भी हिंसा या प्रदर्शन नहीं हुआ है.
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PTI ने कहा- हम कानून को अपने हाथ में लेना नहीं चाहते
तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान की गिरफ्तारी पर पार्टी उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरेशी ने एक वीडियो मैसेज जारी किया है. इसमें उन्होंने कहा कि हम कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहते और न ही संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. लेकिन असली आज़ादी की लड़ाई को आगे बढ़ाना होगा. शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि हम समिति के निर्णयों और वकीलों से बातचीत करने के बाद आगे का फैसला करेंगे.
इमरान की पार्टी ने खटखटाया लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा
इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ पीटीआई लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर करेगी. तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष ने लाहौर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. तहरीक-ए-इंसाफ के नेता उमर खान नियाजी की ओर से लाहौर हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई. दायर याचिका में आईजी पाकिस्तान के पंजाब, सीसीपीओ लाहौर और अन्य को पक्षकार बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि इमरान खान को पुलिस ने अवैध तरीके से हिरासत में लिया था. साथ ही कहा कि इमरान खान का अपहरण किया गया है.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

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