
Karakat Election Result: कौन हैं राजा राम सिंह... जिन्होंने चुनावी मैदान में पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा को किया पस्त
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राजा राम सिंह ने काराकाट लोकसभा सीट पर दमदार जीत हासिल की. राजा राम भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह और पूर्व क्रेंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पर भारी पड़े. राजा राम ने भाकपा माले जॉइन करने के बाद साल 1995 में बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था. तब उन्होंने ओबरा विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी.
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून (मंगलवार) को आए. इस दौरान बिहार के काराकाट लोकसभा निर्वाचन सीट पर सबकी निगाहें थीं. इस सीट पर राजाराम सिंह, उपेंद्र कुशवाहा और पवन सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था. मुकाबले में भाकपा माले के उम्मीदवार (महागठबंधन) राजा राम सिंह विजयी हुए. राजा राम ने अपने निकटमतम प्रतिद्वंद्नी पवन सिंह को 105858 मतों से पराजित किया.
राजा राम सिंह को 3,80,581 मत मिले. वहीं, भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को 2,74,723 मत हासिल हुए. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष एवं एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा तीसरे नंबर पर रहे. कुशवाहा ने 2,53,876 वोट हासिल किए. पवन सिंह का निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरना एनडीए को भारी पड़ा. पवन सिंह को पहले बीजेपी ने आसनसोल से टिकट दिया था, मगर उन्होंने वहां से चुनाव लड़ने में असमर्थता जताई. बाद में वह निर्दलीय के तौर पर काराकाट लोकसभा सीट से मैदान में उतर गए.
काराकाट लोकसभा चुनाव के नतीजे:
कौन हैं राजा राम सिंह?
राजा राम सिंह राजनीति के काफी अनुभव खिलाड़ी हैं. वह कुशवाहा समुदाय (कोइरी) से ताल्लुक रखते हैं. राजा राम ने भाकपा माले जॉइन करने के बाद साल 1995 में बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था. तब उन्होंने ओबरा विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी. फिर 2000 के विधानसभा चुनाव में भी राजाराम सिंह ने इसी सीट से जीत हासिल की. 2015 के चुनाव में भी उन्होंने ओबरा से चुनाव लड़ा, हालांकि तब वह तीसरे पोजीशन पर रहे. 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भी राजा राम ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन सफल नहीं सके.
राजा राम सिंह किसानों के मुद्दों को उठाने में परहेज नहीं करते. वह अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड यूनिट के राज्य प्रमुख हैं. साथ ही वह भाकपा माले के पोलित ब्यूरो के मेम्बर हैं. वह किसान अधिकार संगठन अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव भी हैं. साल 2012 में राजाराम सिंह को जेल भी जाना पड़ा था. तब राजाराम और भाकपा माले पार्टी के समर्थक हसपुरा प्रखंड के सोनहथु पंचायत के मुखिया देवेंद्र कुमार की हत्या की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

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