
JNU अध्यक्ष की यूनिवर्सिटी में एंट्री बैन... जानिए किस वजह से लिया गया ये फैसला
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जेएनयू में पिछले साल लाइब्रेरी में लगे बायोमीट्रिक मशीन में तोड़फोड़ करने के आरोप में JNUSU के पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है. इसे स्टूडेंट यूनियन ने राजनीति से प्रेरित कार्रवाई कहा है.
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने JNUSU की अध्यक्ष की कैंपस में इंट्री को बैन कर दिया है. इनके साथ ही JNUSU के सभी चार पदाधिकारियों और पूर्व यूनियन अध्यक्ष नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए रेस्टिकेट कर दिया गया है. इन पर कैंपस में निगरानी व्यवस्था (लाइब्रेरी व अन्य जगह लगे डिजिटल इंट्री) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ के आरोप हैं.
जिन छात्रों को निष्कासित किया गया है, उनमें JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं. इन छात्रों को "आउट ऑफ बाउंड्स" भी घोषित कर दिया गया है और उन्हें तुरंत प्रभाव से यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसने से रोक दिया गया है. यानी अब ये सभी कैंपस में प्रवेश नहीं कर पाएंगे.
यह अनुशासनात्मक कार्रवाई पिछले साल नवंबर में हुई एक घटना की प्रॉक्टोरियल जांच के बाद की गई है. जब छात्रों ने डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी सहित एकेडमिक जगहों पर फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) लगाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को "बड़े पैमाने पर निगरानी" और प्राइवेसी और एकेडमिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया था.
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चीफ प्रॉक्टर द्वारा 2 फरवरी को जारी एक ऑफिस ऑर्डर के अनुसार, सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के PhD स्कॉलर नीतीश कुमार को यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया है और 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. ऑर्डर में कहा गया है कि छात्रों को लाइब्रेरी के अंदर लगाए गए FRT उपकरणों को नष्ट करने का दोषी पाया गया. यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने कहा है कि यह कार्रवाई अनुशासनात्मक नियमों और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है.
JNUSU ने पॉलिटिकल टारगेट बनाने का आरोप लगाया इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, लेफ्ट समर्थित छात्र समूहों और JNUSU ने इस कदम को कैंपस में विरोध की आवाज़ को दबाने के मकसद से राजनीतिक कार्रवाई बताया. 'JNUSU पर एडमिन का एक्शन' नाम के एक बयान में, यूनियन ने यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन और वाइस चांसलर पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है.

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