
IndiGo संकट, बढ़ती डिमांड, एयरपोर्ट्स पर हाहाकार... समझें- सरकार ने कैसे तय किए 7500 से 18000 रु तक हवाई टिकट के दाम
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पिछले कुछ दिनों में ही इंडिगो की हजारों फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं. वहीं जो फ्लाइट्स चल रही हैं, उनमें भी घंटों की देरी हो रही है. इसके चलते अन्य एयरलाइंस के टिकटों के दाम आसामान छूने लगे. शनिवार को दिल्ली से मुंबई के टिकट 28,000 रुपये से अधिक में बिक रहे थे, जो आम रेट से कहीं ज्यादा था.
देश में घरेलू उड़ानों में पिछले कुछ दिनों से जारी व्यापक संकट के बीच केंद्र सरकार ने इमरजेंसी कदम उठाते हुए घरेलू एयरफेयर पर 7,500 से 18,000 रुपये तक की सीमा तय कर दी है. यह फैसला इंडिगो द्वारा हजारों फ्लाइट रद्द करने के बाद आया, जिसके चलते फ्लाइट्स के टिकट की कीमतें सामान्य से कहीं अधिक बढ़ा दी गईं.
500 किमी तक की दूरी वाले रूट पर एकतरफा किराया 7,500 रुपये से अधिक नहीं होगा. वहीं दिल्ली से मुंबई जैसे 1,000-1,500 किमी के रूट्स पर अधिकतम किराया 15,000 रुपये तय किया गया है. 1500 किमी से लंबी उड़ानों के लिए अधिकतम किराया 18,000 रुपये तय किया गया है.
यह नियम इकोनॉमी क्लास के सभी टिकटों पर लागू होगा. हालांकि एयरपोर्ट शुल्क और टैक्स इसमें शामिल नहीं हैं. मंत्रालय ने कहा कि किराया नियंत्रण की ऐसी स्थिति पिछली बार कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई थी और 2022 में जब मांग स्थिर हुई थी, इसे हटा दिया गया था.
क्यों जरूरी था यह कदम
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह कदम इसलिए जरूरी था क्योंकि इंडिगो के लगातार फ्लाइट कैंसलेशन से दिसंबर में पीक सीजन से ठीक पहले सप्लाई में भारी कमी आ गई थी. भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन, जिसका मार्केट शेयर 60% से ज़्यादा है, के रोजाना सैकड़ों उड़ानें रद्द करने से दूसरी एयरलाइंस के किराए में तेजी से बढ़ोतरी हुई. शनिवार को दिल्ली से मुंबई के टिकट 28,000 रुपये से अधिक में बिक रहे थे, जो आम रेट से कहीं ज्यादा था. बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे एयरपोर्ट पर फंसे हुए यात्रियों की भीड़ देखी गई क्योंकि कैंसलेशन बढ़ते जा रहे थे.
डायनामिक प्राइसिंग का इस्तेमाल करती हैं एयरलाइंस

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