
INDIA गुट में कांग्रेस की मुश्किल राहुल गांधी का नेतृत्व ही नहीं, अडानी-EVM जैसे मुद्दों पर स्टैंड भी | Opinion
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INDIA ब्लॉक में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पहले ममता बनर्जी का नाम लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती दी गई, और अब ईवीएम पर अपने स्टैंड को लेकर कांग्रेस निशाने पर आ गई है. अडानी के मुद्दे पर पहले ही अकेली पड़ चुकी है.
न तो राहुल गांधी क्षेत्रीय दलों के नेताओं को बर्दाश्त कर पाते हैं, न वे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन हजम कर पा रहे हैं. लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद स्वाभाविक रूप से राहुल गांधी के हाव-भाव में अकड़ तो आ ही गई है, लेकिन साथी नेताओं के प्रति उनका व्यवहार पहले जैसा ही लगता है.
अब तक विपक्ष के नेतृत्व की जब भी बात आई है, सबसे बड़ा विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस की दावेदारी बढ़ जाती है. विपक्ष का नेता होने से तो किसी को दिक्कत नहीं होती, लेकिन वो बात सीधे सीधे प्रधानमंत्री पद से जुड़ जाती है, और बखेड़ा खड़ा हो जाता है.
ऐसा तो है नहीं कि जो विपक्ष का नेता बनेगा, वो स्वाभाविक रूप से प्रधानमंत्री पद का भी दावेदार होगा ही. चूंकि अब तक विपक्षी खेमे में ऐसी ही समझ रही है, इसलिए प्रयास बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं.
बीच बीच में नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के नाम प्रधानमंत्री पद के लिए उछाले जाते रहे हैं, और अब तो नये दावेदार अरविंद केजरीवाल भी हो गये हैं. चूंकि कांग्रेस प्रधानमंत्री का पद राहुल गांधी के लिए आरक्षित मानती है, इसलिए हमेशा ही टकराव होता रहता है.
अगर कांग्रेस नेतृत्व ये समझ ले कि किसी और के इंडिया ब्लॉक का नेता बन जाने भर से राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी नहीं खत्म हो जाती तो भी झगड़ा खत्म हो जाये. लेकिन, जैसे ही विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी के अलावा कोई और नाम सामने आता है, कांग्रेस बेचैन हो जाती है.
लोकसभा चुनाव के बाद ये बहस थोड़ी थम गई थी, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद तकरार शुरू हो गई, और तभी तृणमूल कांग्रेस की तरफ से ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक का नेता बनाने की मांग खड़ी हो गई. समाजवादी पार्टी और लालू यादव ने ममता बनर्जी का नाम लेकर सपोर्ट कर दिया और तभी से बवाल मचा हुआ है.

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