
Gorakhpur Murder: पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने वाले डीएम-एसपी पर कब होगा ऐक्शन?
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क्या उत्तर प्रदेश में होटल में रुकने से पहले थाने में जाकर अपना चरित्र प्रमाण पत्र आम नागरिक को लेना पड़ेगा? क्या उत्तर प्रदेश में किसी निर्दोष को रूटीन जांच के नाम पर पकड़कर पुलिस मार डालेगी? उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की पुलिस ने जो किया है, वो उत्तर प्रदेश पुलिस की दरिंदगी का इश्तहार हो गया है, एक बदनुमा दाग हो गया है, क्योंकि गोरखपुर के 6 पुलिसवालों ने एक चार साल के बच्चे के बाप को जानवरों की तरह पीटकर,घसीटकर मार डाला. पहले संगीन कत्ल को छिपाने के लिए हादसे का नाम दिया गया, मगर परिवार की कराहती हुई आवाज़ों ने पुलिस का झूठ उधेड़ दिया. मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कानपुर के इस पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने की संतुष्टि महसूस होती है. सवाल ये है जब पुलिस ही कातिल हो जाएगी तो कौन बचाएगा ? क्या मुख्यमंत्री की दखल के बाद ही इंसाफ आम नागरिक को मिल पाएगा? पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने वाले डीएम-एसपी पर कब होगा ऐक्शन? देखें ये वीडियो.

अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके में नेशनल स्कूल के बाहर दसवीं के छात्र पर जानलेवा हमला हुआ है. परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद 8 से 10 हमलावरों ने छात्र को घेर लिया और उसे स्कूल से लगभग 50 मीटर दूर तक घसीट कर चाकू, पाइप और लकड़ी से बेरहमी से मारा. इस मामले में स्कूल के चार छात्र और उनके साथी शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि यह हमला पुरानी रंजिश के कारण हुआ है.

जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों की छिपने की जगह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है. यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत किया गया जिसमें आतंकियों को पकड़ने और उन्हें मार गिराने के उद्देश्य से सुरक्षा बल सक्रिय थे. इस अभियान में आतंकियों के छिपने के स्थान का पता चलने से इलाके में सुरक्षा अभी और सख्त हो गई है.

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।








