
EXCLUSIVE: भारत के पास 10 दिन से कम का रणनीतिक तेल भंडार, लेकिन दूसरा विकल्प भरपूर देगा साथ!
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भारत के पास पर्याप्त भंडार है, लेकिन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की बात करें तो यह 10 दिनों से भी कम है. भारत में अभी तीन जगहों पर ये भंडार रखे गए हैं.
जंग के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है. इंडिया टुडे की ओर से पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय से मिले एक RTI के जवाब में कहा गया है कि आयात में रुकावट के कारण भारत के रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार 'लगभग 9.5 दिनों की आवश्यकता' को पूरा कर सकता है.
आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) कार्यक्रम को पहली बार 7 जनवरी, 2004 को मंजूरी दी गई थी और इसे लागू करने के लिए 16 जून, 2004 को इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) की स्थापना की गई थी.
अभी भारत में तीन स्थानों - विशाखापत्तनम (1.33 मिलियन मीट्रिक टन), मंगलुरु (1.5 मिलियन मीट्रिक टन) और पडूर (2.5 मिलियन मीट्रिक टन) में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की एसपीआर भंडारण क्षमता है.
सरकार ने रणनीति पेट्रोलियम भंडार पर क्या कहा? राज्यसभा में 23 मार्च, 2026 को दिए गए एक बयान में ISPRL के पास लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64% है. आरटीआई की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सामान्य तेल भंडार के आंकड़े बदलते रहते हैं, जो भंडार और खपत पर निर्भर करता है.
RTI के जवाब से यह भी जानकारी मिलती है कि जुलाई 2021 में सरकार ने एसपीआर नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी दी थी और इमरजेंसी तेल भंडार के लिए दो एक्स्ट्रा प्लांट्स- चंडीखोल (ओडिशा) में 4 मिमी क्षमता और पडूर (कर्नाटक) में 2.5 मिमी क्षमता की मंजूरी दी थी.
सामान्य तेल भंडार से कितना अलग है रणनीतिक तेल भंडार? स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार) जंग, प्राकृतिक आपदा या आपूर्ति बाधित होने जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए सरकार धरती के अंदर स्टोर करके रखती है. यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है. सीधे शब्दों में कहें तो यह भारत के लिए इमरजेंसी तेल रिजर्व है. वहीं सामान्य कच्चे तेल भंडार व्यावसायिक उपयोग (पेट्रोल/डीजल उत्पादन) के लिए रिफाइनरियों द्वारा रखे जाते हैं.













