
Hormuz Crisis: जापान से जर्मनी तक... 22 देश होर्मुज पर एक साथ, वार्निंग देकर ईरान से की ये अपील
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Hormuz Strait Crisis: तेल-गैस संयंत्रों पर ईरान के हमलों और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया की टेंशन चरम पर है और अब इसे लेकर 22 देशों ने एक साथ मिलकर Iran से हमले रोकने और प्रमुख समुद्री रूट को खोलने की अपील की है.
मिडिल ईस्ट में युद्ध (Middle East War) और दुनिया में क्रूड-गैस सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट में हमलों से रुकावट से तेल संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है. इसी आशंका को लेकर अब जापान से जर्मनी तक और ब्रिटेन से यूएई तक 22 देशों ने ईरान से हमले रोकने और Hormuz Strait को बहाल करने की अपील की.
सभी देशों ने ईरानी सेना द्वारा होर्मुज प्रभावी रूप से बंद किए जाने पर चिंता जताई और संयुक्त बयान जारी कर बड़ी चेतावनी भी दी है. बयान में कमर्शियल जहाजों पर हमलों और रूट बंद किए जाने को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है.
'ये अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा...' मिडिल ईस्ट युद्द के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाल ही में हुए हमलों की 22 देशों ने एक साथ मिलकर निंदा की है. एक संयुक्त बयान जारी करते हुए इन देशों ने चेतावनी जारी की है कि होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट में रुकावट न सिर्फ ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकती है.
बयान में कहा गया है कि ईरान के हमलों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. शिपिंग रूट में रुकावट दुनिया की आर्थिक स्थिरता को भी खतरे में डाल सकती है. उन्होंने ईरान से बारूदी सुरंगें बिछाने, मिसाइल और ड्रोन अटैक करने और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही रोकने के उसके प्रयासों को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिए कहते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने के लिए कहा है.
इन देशों ने की Hormuz खोलने की अपील एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को एक साथ दुनिया के 22 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए ईरान से हमले रोकने की बात कही, इसके साथ ही अपील की कि वो होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोले. ईरान से होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की अपनी करने वाले देशों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ अन्य देश शामिल हैं. स्टेटमेंट में इस रूट पर तेल-गैस के जहाजों और ऊर्जा सुविधाओं पर ईरानी हमलों की निंदा भी की है.
22 देशों के ग्रुप ने कहा है कि इस तरह के हमलों से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने के चलते खाद्य और ईंधन सुरक्षा पर गहरा असर हो सकता है. इससे पहले से ही उच्च महंगाई और धीमी ग्रोथ से जूझ रहीं कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की मुसीबतें ज्यादा बढ़ सकती हैं.













