
Exclusive: कागजों पर योजना, सेंटर्स पर ताला... दिल्ली-MP-गुजरात के कौशल विकास केंद्रों पर सबसे बड़ी पड़ताल
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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को लेकर कैग की रिपोर्ट और आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट ने चौंकाने वाली सच्चाई उजागर की है. दिल्ली, भोपाल और गुजरात में कई कौशल विकास केंद्र या तो बंद मिले या केवल कागजों में मौजूद पाए गए. हेल्पलाइन से मिले पते पर ताले लटके थे, ट्रेनिंग और रोजगार की व्यवस्था नहीं दिखी. सवाल यह है कि युवाओं के लिए शुरू की गई योजना जमीन पर आखिर चल कहां रही है?
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी स्किल इंडिया मोदी सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसका मकसद देश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें रोजगार से जोड़ना है. कम पढ़े-लिखे, स्कूल छोड़ चुके और बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का विजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को देश के सामने रखा था और इसके लिए स्किल इंडिया योजना शुरू की थी.
योजना का लक्ष्य था 2020 तक एक करोड़ युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देना और उन्हें रोजगार से जोड़ना था. लेकिन इस योजना के शुरू होने के करीब साढ़े दस साल बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सपना जमीन पर उतर पाया? हाल ही में आई CAG यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने इस योजना में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है.
कागजों में केंद्र, हकीकत में लटके मिले ताले
इसी के बाद आजतक की टीम देशभर में 'ऑपरेशन रोजगार' के तहत स्किल इंडिया की पड़ताल में जुटी. देश की राजधानी दिल्ली से पड़ताल शुरू हुई. हेल्पलाइन नंबर से मिले पते के आधार पर जब टीम अलीपुर स्थित प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र पहुंची, तो वहां सालों से ताला लटका मिला. स्थानीय लोगों और मकान मालिक ने बताया कि यह केंद्र 2-3 साल से बंद है, भुगतान नहीं मिलने के कारण संचालन ठप हो गया. निजामुद्दीन स्थित ITI में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत कोई कोर्स यहां नहीं चल रहे.
फैकल्टी ने साफ कहा कि जो कुछ है, वह सिर्फ कागजों तक सीमित है. हरिनगर और गोल मार्केट के ITI केंद्रों में भी यही हकीकत सामने आई. यहां स्किल इंडिया सेंटर के बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन ट्रेनिंग नहीं होती. जब आजतक की टीम कौशल भवन (नई दिल्ली में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय का मुख्यालय) पहुंची, तो अधिकारियों ने फिर वही हेल्पलाइन नंबर थमा दिया, जिससे बंद पड़े केंद्रों के पते मिले थे.
भोपाल में पते तो मिले, पर स्किल सेंटर गायब

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