
China-Taiwan Tension: चीन से 1945 में अलग हो गया था ताइवान, जानिए पूरा इतिहास
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चीन के लिए यूक्रेन युद्ध सिर्फ एक बूस्टर है. वो पिछले 77 वर्षों से ताइवान पर कब्जा करने का इरादा कर रहा है. लेकिन ये एक राजनीतिक विवाद है जो बढ़ते-बढ़ते दो देशों का विवाद बन गया. इसकी शुरूआत 1940 के दशक में चीन में चल रहे गृहयुद्ध से हुई थी. 1945 में दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद ताइवान, चीन से अलग हो गया था. जापान ने अपनी हार के बाद कॉमिंगतांग पार्टी को ताइवान का नियंत्रण सौंपा था. लेकिन जब कॉमिंगतांग पार्टी ने वहां अपनी सरकार बनाई तो चीन से विवाद हो गया. माओत्से तुंग का मानना था कि चीन में जब जीत उनकी हुई है तो ताइवान पर अधिकार भी उनका ही होना चाहिए.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.

आज यु्द्ध का 24वां दिन है. इजरायल पर ईरान और जवाब में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. इस बीच सवाल ये कि क्या डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज पर फंस गए हैं. ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से लग रहा है कि जंग छेड़ने से पहले हॉर्मुज को लेकर ट्रंप सोच नहीं पाए थे. देखें कैसे बदलते जा रहे ट्रंप के बयान.










