
‘CAA बना उकसावे का हथियार...’, दिल्ली हिंसा केस में 'सुप्रीम' फैसले से पहले कोर्ट में आरोपियों-पुलिस के बीच तीखी बहस
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दिल्ली दंगों से जुड़े 'लार्जर कंस्पिरेसी केस' में सुप्रीम कोर्ट के सामने आरोपियों और दिल्ली पुलिस की ओर से तीखी बहस देखने को मिली. आरोपियों ने जांच में देरी, लंबे कारावास और ठोस सबूतों की कमी का मुद्दा उठाया, जबकि पुलिस ने इसे देश को अस्थिर करने की पूर्व-नियोजित साजिश बताया.
दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट के सामने आरोपियों और दिल्ली पुलिस दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं. इस सुनवाई में एक तरफ आरोपियों ने जांच और ट्रायल की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने इसे देश को अस्थिर करने की साजिश बताया. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगा.
आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि इस मामले की जांच में असामान्य और बेवजह देरी हुई है. एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ट्रायल शुरू होने में कई साल लग गए, जबकि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं. उनका आरोप है कि पुलिस बार-बार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करती रही, जिससे ट्रायल लगातार टलता रहा और मामला अनिश्चित समय तक लटका रहा.
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उमर खालिद के मामले में बचाव पक्ष ने कहा कि दंगों के समय वह दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे. उनके खिलाफ न तो किसी हथियार का सबूत है, न कोई चश्मदीद और न ही हिंसा भड़काने का कोई सीधा प्रमाण.
उमर खालिद का क्या पक्ष है?

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