
Bihar Election 2025: धनबल, बाहुबल और आपराधिक विरासत... हलफनामों में उजागर हुआ बिहार की राजनीति का कड़वा सच
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एक बार फिर धनबल, बाहुबल और आपराधिक विरासत सुर्खियों में हैं. उम्मीदवारों के हलफनामों में घोषित करोड़ों की संपत्ति और गंभीर मामलों की लंबी लिस्ट ने राज्य की राजनीति का वही कड़वा सच सामने ला दिया है, जहां चुनाव सिर्फ वादों से नहीं, बल्कि ताकत और खौफ से भी सुर्खियों में रहते हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है. इस बार के चुनाव में एक बार फिर बाहुबलियों की राजनीति चर्चा के केंद्र में हैं. बिहार की राजनीति का यह वह स्याह पक्ष है, जहां नेता केवल वादों के दम पर नहीं, बल्कि अपनी ताकत, अकूत संपत्ति और खौफ के बल पर चुनाव लड़ते और जीतते हैं. इस चुनाव में भी ऐसे कई उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं, जिनकी संपत्ति का मूल्य उनके बाहुबल जितना ही सुर्ख़ियों में है.
मतदाता इन उम्मीदवारों के हलफनामों में घोषित संपत्ति और उन पर दर्ज आपराधिक मामलों की लंबी फेहरिस्त को देखकर यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन वास्तव में ताकतवर है और कौन कानूनी पचड़ों में उलझा हुआ है. यह सच्चाई है कि बिहार के चुनाव में धन और बाहुबल ही अक्सर खेल का रुख तय करते हैं.
बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का दबदबा कोई नई बात नहीं है. ये ऐसे व्यक्ति हैं जो अपनी ताकत और प्रभाव का इस्तेमाल करके सत्ता तक पहुंचते हैं. इस विधानसभा चुनाव में भी ऐसे अनेक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी संपत्ति करोड़ों में है और जिन पर हत्या, अपहरण और जबरन वसूली जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये उम्मीदवार मतदाताओं को डरा-धमकाकर या पैसे का लालच देकर अपना समर्थन हासिल करते हैं. उनकी वित्तीय घोषणाएं उनकी जमीनी ताकत का एक स्पष्ट अनुमान देती हैं.
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