
AAP के कैंपेन गीत पर चुनाव आयोग की आपत्तियों ने तो केजरीवाल का प्रचार ही कर डाला
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अब आम आदमी पार्टी के कैंपेन गीत पर चुनाव आयोग की आपत्ति के बाद AAP नेता आपे से बाहर हो गये हैं, और केंद्र की बीजेपी सरकार पर बरस पड़े हैं - लेकिन बीजेपी का सवाल है, आयोग से मंजूरी लिये बगैर प्रचार गीत लॉन्च ही क्यों किया गया? राजनीति अपनी जगह है, लेकिन ये सवाल तो बनता है.
आम आदमी पार्टी के कैंपेन गीत पर चुनाव आयोग के ऑब्जेक्शन के बाद एक नया विवाद शुरू हो गया है. और आयोग की आपत्ति पर आम आदमी पार्टी और बीजेपी एक बार फिर आमने-सामने आ गये हैं.
चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के कैंपेन गीत 'जेल का जवाब वोट से' में इस्तेमाल किये गये कुछ शब्दों, और वीडियो के कुछ हिस्सों को भड़काऊ और आपत्तिजनक बताया है - आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना है.
चुनाव आयोग के एक्शन पर रिएक्शन में आम आदमी पार्टी नेता आतिशी ने दावा कर दिया कि चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के कैंपेन गीत पर रोक लगा दी है, लेकिन आयोग की तरफ से दावे को खारिज करते हुए कहा गया कि पाबंदी की लगाये जाने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है.
कैंपेन सॉन्ग पर रोक के आम आदमी पार्टी के दावे पर पर बीजेपी की तरह से अलग ही सवाल उठाया गया है - मुख्य चुनाव अधिकारी की मंजूरी लिए बिना प्रचार गीत को लॉन्च ही क्यों किया गया?
नियमों के मुताबिक, प्रचार गीत हो या प्रचार सामग्री सार्वजनिक तौर पर लॉन्च किये जाने से पहले राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से बाकायदा परमिशन लेनी होती है. आम आदमी पार्टी के केस में दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि आवेदक को ये भी बताया गया था कि अगर वे फैसले से सहमत नहीं हैं, तो वो दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में बनी एमसीएमसी के सामने अपील दायर कर सकते हैं.
कैंपेन सॉन्ग पर आयोग के एक्शन पर दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी कह रही हैं, बीजेपी ने अब हमारे खिलाफ अपने एक और हथियार भारत के चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया है... सबसे पहले बीजेपी सीएम अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करने से रोकने के मकसद से झूठे मामले में गिरफ्तार करवाती है... अब ये हमारे प्रचार गीत को भी बंद करने की साजिश रच रही है.

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