
9 साल सुनवाई, 84 गवाह और फ्रिज... पुलिसवाले ने किया था पुलिसवाली का कत्ल, समंदर में फेंके थे लाश के टुकड़े
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कत्ल का एक ऐसा मामला जिसमें कातिल भी पुलिस. मरने वाली भी पुलिस और जांच करने वाली पुलिस. लेकिन वारदात को करीब 9 साल का वक्त गुजरने के बावजूद अब तक मरने वाली की लाश तक बरामद नहीं हो सकी. आम तौर पर कत्ल के ऐसे मामले इंसाफ की कसौटी पर दम तोड़ देते हैं, लेकिन ये मामला अलग मिसाल बन गया.
Assistant Sub Inspector Ashwini Bidre: बात साल 2016 की है. महाराष्ट्र पुलिस की एक लेडी एएसआई (ASI) को अगवा किया गया और फिर उसका कत्ल कर दिया गया. बाद में कातिल ने उसकी लाश के टुकड़े किए और उन्हें समंदर में फेंक दिया. इस कत्ल के इल्जाम में कोई शातिर बदमाश या माफिया नहीं, बल्कि एक पुलिस इंस्पेक्टर को ही गिरफ्तार किया गया. अब पूरे 9 साल बाद मुंबई की एक अदालत ने आरोपी इंस्पेक्टर को दोषी करार दिया है और इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर बताया है. चलिए जानते हैं क्यों ऐसा हुआ.
कत्ल का एक ऐसा मामला जिसमें कातिल भी पुलिस. मरने वाली भी पुलिस और जांच करने वाली पुलिस. लेकिन वारदात को करीब 9 साल का वक्त गुजरने के बावजूद अब तक मरने वाली की लाश तक बरामद नहीं हो सकी. आम तौर पर कत्ल के ऐसे मामले इंसाफ की कसौटी पर दम तोड़ देते हैं, क्योंकि लाश के गायब हो जाने के साथ ही ये शक रह ही जाता है कि पता नहीं जिसे मुर्दा बताया जा रहा है, वो वाकई मरा भी है या नहीं.
लेकिन इस केस में ऐसा नहीं है. मरने वाली की लाश नहीं मिलने के बावजूद ना सिर्फ पुलिस ने अपनी तफ्तीश पूरी की, बल्कि उसी तफ्तीश में मिले सुबूतों की बिनाह पर कोर्ट ने आरोपियों को गुनहगार भी करार दिया. और तो और कोर्ट ने अब इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की कैटेगरी में भी रखा है. और सजा सुनाने की तारीख 11 अप्रैल तय की है.
मामला मुंबई के करीब ठाणे का है, जहां के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अभय कुरुंदकर ने अपने ही महकमे की असिस्टेंट सब इंस्पेकटर अश्विनी बिदरे की हत्या कर दी थी. 11 अप्रैल 2016 को कुरुंदकर ने ना सिर्फ अपनी सहकर्मी अश्विनी बिदरे की हत्या कर दी, बल्कि उसकी लाश को टुक़ड़ों में काट कर ऐसे ठिकाने लगाया कि लाख कोशिश करने के बावजूद पुलिस और नेवी के एक्सपर्ट्स उसे ढूंढ नहीं सके. ये और बात है कि पुलिस की निगरानी में गोताखोर मुंबई के करीब वसई क्रीक में कई दिनों तक लाश की तलाश करते रहे, जिसे कुरुंदकर ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने के बाद ठिकाने लगा दिया था.
असल में कुरंदर और बिदरे दोनों शादीशुदा थे. लेकिन फिर दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में थे. अश्विनी बिदरे ने अपने पति को छोड़ दिया था और ठाणे में अकेली रहती थी. इस बीच अश्विनी ने कुरुंदकर पर शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन कुरंदकर इसके लिए तैयार नहीं था. जिसके चलते दोनों में अक्सर लड़ाइयां होती थीं और आखिरकार ये लड़ाई अश्विनी के कत्ल के साथ ही खत्म हुई.
पुलिस की तफ्तीश में पता चला कि कत्ल के बाद कुरुंदकर ने बाकायदा वुड कटर से अश्विनी कुरुंदकर की लाश के टुकड़े किए. उन्हें फ्रिज में रखा और फिर किस्तों में लाश के टुकड़े ठिकाने लगाता रहा. शरीर के बाकी हिस्से तो गायब कर चुका था, लेकिन चूंकि धड़ फ्रिज में नहीं समा सका, तो उसने उसे एक बक्से में बंद कर वसई क्रीक में फेंक दिया.

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