
80 करोड़ में बिका दुनिया का सबसे महंगा पर्स, जानिए चमड़े से बना ये बैग क्यों है इतना खास
AajTak
दुनिया का सबसे महंगा पर्स 80 करोड़ रुपये में बिका. यह पर्स बिर्किन बैग श्रृंखला का पहला प्रोटोटाइप था. इसे बिर्किन बैग बनाने वाली कंपनी हर्मीस के सीईओ ने ब्रिटिश अभिनेत्री जेन बिर्किन के लिए डिजाइन किया था.
अभिनेत्री, गायिका और फैशन आइकन जेन बिर्किन के लिए 1984 में बनाया गया हर्मेस बिर्किन हैंडबैग नीलामी में 7 मिलियन यूरो (8.18 मिलियन डॉलर) में बिका. शुल्क सहित इसके लिए अंतिम बोली लगाने वाले को 8.58 मिलियन यूरो यानी 10 मिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ा. इस तरह यह पर्स अब तक के इतिहास का सबसे महंगा बैग बन गया है. भारतीय रुपये में इसकी कीमत 80 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने नीलाम हुए दुनिया के इस सबसे महंगे बैग के रहस्यमय खरीदार के नाम का खुलासा अब तक नहीं हुआ था. अब साकिमोतो का नाम सामने आया है. जापानी रीसेल दिग्गज शिंसुके साकिमोतो नाम के एक शख्स नेने 1984 के प्रोटोटाइप बैग को खरीद लिया.
कौन है दुनिया के इस सबसे महंगे बैग का खरीदार साकिमोते ने इस बैग के लिए आखिरी बोली लगाई थी. और उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अंतिम लगाई थी—जिससे यह प्रतिष्ठित फैशन कलाकृति इतिहास का सबसे महंगा पर्स बन गया.
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, साकिमोतो वैल्यूएंस होल्डिंग्स के सीईओ हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि यह अब तक की मेरी किसी भी वस्तु की सबसे महंगी खरीदारी थी. यह बहुत रोमांचक था, लेकिन इससे मुझे सचमुच बहुत बुरा लगा.
क्यों खास है ये बिर्किन बैग यह ब्रिटिश "इट गर्ल" जेन बिर्किन के लिए डिजाइन किया गया था. जेन बिर्किन एक अभिनेत्री, गायिका और मॉडल थीं. उनके नाम से ही इस पर्स का नाम बिर्किन बैग पड़ा. जेन बिर्किन - जिनकी मृत्यु 2023 में हुई, उन्होंने इस बैग का लगभग हर दिन उपयोग किया. उसके बाद उन्होंने 1994 में इसे एड्स अनुसंधान के लिए बेच दिया.
वर्ष 2000 में इस प्रतिष्ठित बैग का स्वामित्व में बदल गया. जब एक निजी नीलामी में इसे फ्रांसीसी कलेक्टर कैथरीन बेनियर को अज्ञात राशि में बेच दिया गया. सीएनएन के अनुसार, बेनियर ने पिछले 25 सालों से इस हैंडबैग को अपने पास रखा. अब जाकर सोथबी में इसकी नीलामी हुई.

इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ सबसे बड़ी चुनौती उन्हें चार्ज करने की होती है. रेंज एंजायटी जैसे शब्द इसी चिंता से निकले हैं, जहां लोगों को ये डर सताता रहता है कि जाने कब उनकी कार बंद हो जाए और उसे चार्ज कहां करेंगे. इसका निदान चीनी कंपनियां तेजी से खोज रही हैं. एक चीनी कंपनी ने सिर्फ 11 मिनट में फुल चार्ज होने वाली सोडियम-आयन बैटरी तैयार की है.












