
40 सीट, 6 दावेदार... नीतीश के पालाबदल से बिहार में एकदम बदल गया लोकसभा चुनाव का गणित!
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नीतीश कुमार के इंडिया ब्लॉक छोड़ एनडीए में जाने के बाद बिहार की 40 लोकसभा सीटों का गणित एकदम से बदल गया है. एनडीए के खाते में अब सूबे की 40 में से 39 सीटें आ तो गई हैं लेकिन सीट शेयरिंग के मोर्चे पर भी माथापच्ची बढ़ गई है.
बिहार में नीतीश कुमार फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में लौट आए हैं. नीतीश ने कहा है कि जहां से गए थे, वहीं लौट आए हैं. अब इधर-उधर जाने का सवाल ही नहीं है. नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी से सत्ता की तस्वीर बदल गई है तो साथ ही बदल गया है गठबंधन का गणित और वोटों का समीकरण भी. बदल गया है सूबे की 40 लोकसभा सीटों का गणित भी. नीतीश के साथ आने से सीट शेयरिंग के मोर्चे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की टेंशन भी बढ़ गई है.
कैसे बदल गया लोकसभा सीटों का गणित
कुछ ही महीने में लोकसभा चुनाव होने हैं लेकिन इससे पहले ही नीतीश के पाला बदलने से बिहार की लोकसभा सीटों का गणित पूरी तरह से बदल गया है. चंद रोज पहले तक एनडीए की 23 सीटों के मुकाबले विपक्षी इंडिया 17 सीटों के साथ करीब-करीब बराबरी वाली स्थिति में था. लेकिन नीतीश के एनडीए में जाने के बाद यह गणित बदल गया है.
नंबर गेम में एनडीए एक झटके में 39 लोकसभा सीटों पर पहुंच गया है. वहीं, इंडिया गठबंधन 17 से गिरकर महज एक सीट पर आ गया है. इंडिया ब्लॉक के पास बिहार में जो एकमात्र सीट बची है, वह किशनगंज है जहां से 2019 में कांग्रेस के उम्मीदवार को जीत मिली थी. 2019 चुनाव में लालू यादव की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का खाता तक नहीं खुल सका था.
नीतीश के आने से फ्रंटफुट पर एनडीए
नीतीश के पाला बदलने के बाद एनडीए फ्रंटफुट पर आ गया है. ऐसा कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार को साथ लाने से एनडीए को लोकसभा चुनाव से पहले मोरल अपरहैंड मिल गया है. दरअसल, जेडीयू का अपना एक बेस वोट बैंक है. पेशे से इंजीनियर रहे नीतीश कुमार ने बिहार की सियासत में सोशल इंजीनियरिंग का ऐसा ताना-बाना बुना है, जिससे भले ही वो अकेले जीतने की स्थिति में रहें या ना रहें, जिसके साथ चले जाएं उसकी जीत करीब-करीब सुनिश्चित हो जाती है.

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