
15 साल, 11 आतंकी हमले और 227 लोगों की मौत... जानें J&K में आतंकियों ने आम लोगों पर कब-कब बरपाया कहर
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Pahalgam Terror Attack: जम्मू और कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में मौजूद टूरिस्टों पर गोलियां बरसाने वाले आतंकियों के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की विक्टर फोर्स, स्पेशल फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और सीआरपीएफ शामिल है.
जम्मू और कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में मौजूद टूरिस्टों पर गोलियां बरसाने वाले आतंकियों के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की विक्टर फोर्स, स्पेशल फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और सीआरपीएफ शामिल है. इस अभियान में सबसे आगे भारतीय सेना की विक्टर फोर्स है, क्योंकि इसे घाटी में आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए जाना जाता है. इस आतंकी हमले में 26 लोगों के मारे जाने की खबर है और 20 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं.
इस हमले का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक टूरिस्ट अपना वीडियो बना रहा था, उसी वक्त आतंकियों ने हमला कर दिया. 5 से 6 आतंकियों ने पर्यटकों को गोली मारने से पहले उनका नाम, उनकी पहचान, धर्म पूछा और जिसने भी अपना हिंदू नाम बताया, उसे गोली मार दी. पीड़ित चश्मदीदों के मुताबिक, आतंकियों ने लोगों को धमकी दी थी कि जो अजान नहीं करेगा, उसे गोली मार दी जाएगी. इस तरीके से भी वो हिंदू और मुस्लिम की पहचान कर रहे थे. हिंदूओं को चुन-चुन कर बेरहमी से गोलियां मार रहे थे.
बैसारन घाटी में हमले के वक्त आतंकियों ने सेना की नकली वर्दी पहनी हुई थीं, इसलिए शुरुआत में किसी को उनपर शक नहीं हुआ. लेकिन थोड़ी देर बाद ही जब उन्होंने हिंदू पर्यटकों की पहचान पूछकर उनपर फायरिंग शुरू कर दी तो भगदड़ गई. आतंकियों ने जानबूझकर ऐसे हिंदू पुरुषों को निशाना बनाया, जो अपनी पत्नी या परिवार के साथ आए थे. इस आतंकी हमले की तस्वीरें और वीडियो बहुत भयानक हैं. इस वीडियो में जिन महिलाओं के पतियों पर आतंकवादी हमला हुआ है, वो रोती और बिलखती हुई दिख रही हैं. 5 अगस्त 2019 को संविधान में संशोधन करके जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए को हटाया गया था. इसके बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को कवर करने के लिए आईएसआई ने टीआरएफ यानी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का गठन किया था. पाकिस्तानी सेना इस आतंकी संगठन की मदद करती है. टीआरएफ ज़्यादातर लश्कर के फंडिंग चैनलों का इस्तेमाल करता है. गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था, "द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक मुखौटा संगठन है.''
साल 2019 में टीआरएफ अस्तित्व में आया था. उसके बाद से वो जम्मू और कश्मीर में लगातार आतंकी हमले कर रहा है. टीआरएफ का 'हिट स्क्वॉड' और 'फाल्कन स्क्वॉड' आने वाले दिनों में कश्मीर में बड़ी चुनौती पेश कर सकता है. इस आतंकी मॉड्यूल को टारगेट किलिंग को अंजाम देने, जंगली और ऊंचे इलाकों में छिपने के लिए ट्रेंड किया गया है. टीआरएफ के नए टेरर मॉड्यूल 'फाल्कन स्क्वॉड' को अत्याधुनिक हथियारों की एक बहुत बड़ी खेप मिली है. इसका इस्तेमाल कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों के लिए हो रहा है.
साल 2000 के बाद जम्मू-कश्मीर में आम लोगों पर हुए बड़े आतंकी हमले...
21 मार्च, 2000:-

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