
हवाई हमले का अभ्यास, ब्लैकआउट और ड्रोन अटैक से बचाव के तरीके... इन 4 राज्यों में कल 'ऑपरेशन शील्ड' के तहत होगी मॉक ड्रिल
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गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार 29 मई यानी कल गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत केंद्र शासित प्रदेशों के कई जिलों में शाम 5 बजे से 'ऑपरेशन शील्ड' नामक नागरिक सुरक्षा अभ्यास (Civil Defence Exercise) किया जाएगा. मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों का अभ्यास किया जाएगा, जिसमें नागरिकों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के कॉर्डिनेशन कैपेसिटी को परखा जाएगा. गृह मंत्रालय ने इस अभ्यास को सफल बनाने के लिए जिलों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं.
गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देशानुसार 29 मई यानी कल गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत केंद्र शासित प्रदेशों के कई जिलों में शाम 5 बजे से 'ऑपरेशन शील्ड' नामक नागरिक सुरक्षा अभ्यास (Civil Defence Exercise) किया जाएगा. ये मॉक ड्रिल संभावित युद्ध या आपदा की स्थिति में नागरिक सुरक्षा की तैयारियों को परखने के लिए की जाती है. बता दें कि कल पंजाब में कोई मॉक ड्रिल नहीं होगी. सूब में 3 जून को ये अभ्यास किया जाएगा.
मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों का अभ्यास किया जाएगा, जिसमें नागरिकों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के कॉर्डिनेशन कैपेसिटी को परखा जाएगा. गृह मंत्रालय ने इस अभ्यास को सफल बनाने के लिए जिलों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं.
क्या-क्या होगा इस अभ्यास में? नागरिक सुरक्षा वॉर्डन, स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी और NCC, NSS, NYKS, भारत स्काउट्स और गाइड्स जैसे युवा स्वयंसेवकों को उनकी सेवाओं के लिए बुलाया जाएगा, ताकि वे अलग-अलग कार्यों में नागरिक प्रशासन की मदद कर सकें.
हवाई हमले और ड्रोन से हमले का अभ्यास अभ्यास में दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइल हमलों की स्थिति को दर्शाया जाएगा. इस दौरान एयर फोर्स और नागरिक सुरक्षा कंट्रोल रूम्स के बीच हॉटलाइन एक्टिव की जाएगी, साथ ही हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन भी चलाए जाएंगे.
ब्लैकआउट किया जाएगा शाम 8:00 बजे से 8:15 बजे तक आम नागरिक इलाकों (जरूरी सेवाओं को छोड़कर) में ब्लैकआउट किया जाएगा. इसके लिए पहले से प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि लोग समय पर लाइटें बंद कर सकें और सायरनों की जांच हो सके.
ड्रोन हमले के बाद बचाव और निकासी का अभ्यास मॉक ड्रिल के दौरान इसका अभ्यास किया जाएगा कि अगर सेना का एक स्टेशन दुश्मन ड्रोन के हमले की चपेट में आ जाए तो क्या करें. इस दौरान स्टेशन कमांडर द्वारा स्थानीय प्रशासन की मदद से परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का रेस्क्यू अभ्यास होगा. इसमें 20 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का सिमुलेशन किया जाएगा.

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