
हरियाणा में चुनाव और सरकार का फैसला... आखिर गुरमीत राम रहीम को हर बार कैसे मिल जाती है पैरोल या फरलो?
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अब सवाल ये है कि देश की जेलों में बड़े बड़े तोप और पहुंच वाले कैदी भी बंद हैं. तो फिर गुरमीत राम रहीम के ऊपर ही पैरोल और फरलो की ये कृपा क्यों? तो याद रखिये गुरमीत का बलात्कारी और कातिल चेहरा सामने आने से पहले एक चेहरा वो भी था जिसे बाबा नाम दिया गया था और उस बाबा के चरणों और दरबार में बड़े बड़े धुरंधर माथा टेकने और हाजरी लगाने आते थे.
Gurmeet Ram Rahim Singh out on furlough: सचमुच, जेल न हो गई सराय खाना हो गया. कानून न हुआ तमाशा हो गया. सजा न हुई किश्तों की दिहाड़ी हो गई. कौन कहता है कानून सबके लिए बराबर होता है. छोटा, बड़ा, अमीर गरीब, कमजोर ताकतवर में फर्क नहीं करता. एक अकेले शख्स ने सारे मुहावरों को झूठा साबित कर दिया. उसने ये भी साबित कर दिया है कि भले ही कोई रेप करे, किसी का कत्ल करे. 20-20 साल की दो-दो उम्र कैद की सजा झेले, तो भी जेल के बाहर आजाद रहा जा सकता है. वो पैरोल और फरलो के नाम पर आजादी के मजे ले रहा है. हम बात कर रहे हैं रेपिस्ट-कातिल बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा की.
21 दिनों तक मनाया था बर्थ डे अपने देश में शायद कोई ससुराल भी इतनी जल्दी नहीं आता जाता होगा. पर इस बंदे ने सचमुच ससुराल वाली जेल की कहावत को बार-बार सच किया है. अभी पिछले 13 अगस्त को ही 21 दिनों की छुट्टी मनाने एक जमाने का रॉक स्टार बाबा जो लव चार्जर भी था, जेल यानी ससुराल से बाहर आया. 21 दिनों तक धूम धाम से अपना बर्थ डे मनाया. आजादी के सारे मजे लूटे. फिर 3 सितंबर को अगली बार बाहर आने के लिए वापस जेल पहुंच गया.
3 हफ्ते के अंदर-अंदर फिर मिली फरलो इस बार अंदर मन नहीं लग रहा था. इसलिए जेल में बैठे-बैठे फिर से छुट्टी की अर्जी लगा दी. कमाल तो जेल के बाहर बैठा कानून है, जो बस रॉक स्टार की छुट्टी की अर्जी का लिफाफा देख कर ही छुट्टी मंजूर कर लेता है. अंदर का मजमून पढ़ने की जरूरत ही नहीं पड़ती. जी हां, महज 3 हफ्ते के अंदर-अंदर एक बार फिर से लव चार्जर चार्ज होने ससुराल से बाहर आ रहे हैं. अब तो इत्तेफाक पर भी शक होने लगा है. पर इत्तेफाक ये है कि हरियाणा में फिर से चुनाव है.
नहीं मिलेगा राम गुरमीत राम रहीम जैसा कैदी NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के मुताबिक इस वक्त पूरे देश में लगभग छह लाख कैदी अलग अलग जेलों में बंद हैं. इन छह लाख में से लगभग पौने दो लाख ऐसे कैदी हैं जो सजायाफ्ता हैं यानी जिनके गुनाहों का हिसाब हो चुका है और उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है. दावा है कि पूरे देश की जेलों में घूम आइये, और बस एक ऐसा कैदी दिखा दीजिए जो पिछले सात सालों में 255 दिन से ज्यादा पैरोल और फरलो के नाम पर जेल से बाहर भेजा गया हो. शर्तिया गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा के अलावा दूसरा नाम ढूंढ़ने से आपको नहीं मिलेगा.
बड़े बड़े धुरंधर टेकते हैं माथा, लगाते हैं हाजरी अब सवाल ये है कि देश की जेलों में बड़े बड़े तोप और पहुंच वाले कैदी भी बंद हैं. तो फिर गुरमीत राम रहीम के ऊपर ही पैरोल और फरलो की ये कृपा क्यों? तो याद रखिये गुरमीत का बलात्कारी और कातिल चेहरा सामने आने से पहले एक चेहरा वो भी था जिसे बाबा नाम दिया गया था और उस बाबा के चरणों और दरबार में बड़े बड़े धुरंधर माथा टेकने और हाजरी लगाने आते थे. तब बाबा का आशीर्वाद बरसता था. अब उसी बाबा को वही आशीर्वाद रिटर्न गिफ्ट में मिल रहा है.
चुनावी मौसम में मिलती है आजादी! वैसे ये रिटर्न गिफ्ट तब तब ज्यादा मिलता है जब जब चुनावी मौसम आता है. और अपने यहां तो हर मौसम चुनावी मौसम होता है. कभी निगम चुनाव, कभी पंचायत चुनाव, कभी विधान सभा, कभी लोकसभा यहां तक कि उप चुनाव. और ये इत्तेफाक नहीं बल्कि हकीकत है कि बस कुछ वक्त बाद ही उसी हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है, जिस हरियाणा में बाबा के आशीर्वाद का सबसे ज्यादा असर है. तो चुनावी तैयारी से पहले तैयारियों का जायजा लेने के लिए बाबा को जेल से बाहर निकालना जरूरी तो था ही.

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