
'हम पैदा होते हैं, फिर हमारा शोषण होता है' एक्ट्रेस विजेता पार्वती ने सुनाया बचपन का दर्द
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नेशनल अवॉर्ड विजेता पार्वती ने हाल ही में अपने बचपन के गहरे परेशान करने वाले अनुभवों पर विचार किया. उन्होंने बताया कि कई बार अजनबी पुरुषों ने उनके साथ छेड़छाड़ की थी. पार्वती ने The Male Feminist पॉडकास्ट पर इन घटनाओं के बारे में बताया. उन्होंने एक खास वाकये का जिक्र किया, जो सालों से उनके साथ है.
साउथ एक्ट्रेस पार्वती थिरुवोथु अपनी बेबाकी के लिए जाती हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी के कई अलग-अलग पहलुओं पर बात की है. एक्ट्रेस कभी अपनी सच्चाई बोलने से पीछे नहीं हटीं. अब पार्वती ने उन यादों के बारे में खुलकर बात की है, जिन्हें कभी किसी बच्चे को नहीं सहना चाहिए.
नेशनल अवॉर्ड विजेता पार्वती ने हाल ही में अपने बचपन के गहरे परेशान करने वाले अनुभवों पर विचार किया. उन्होंने बताया कि कई बार अजनबी पुरुषों ने उनके साथ छेड़छाड़ की थी. पार्वती ने The Male Feminist पॉडकास्ट पर इन घटनाओं के बारे में बताया. उन्होंने एक खास वाकये का जिक्र किया, जो सालों से उनके साथ है.
शोषण पर पार्वती का छलका दर्द
बातचीत के दौरान, पार्वती ने बताया कि उनके लिए ऐसी घटनाएं कितनी जल्दी शुरू हो गई थीं. कई उदाहरणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हम पैदा होते हैं, और फिर हमारा शोषण होता है. ऑटो में घुस रहे हो, पिंच कर दिया. रेलवे स्टेशन पर मम्मी को छोड़कर वापस डैड के साथ चल रही थी, कोई छाती पर मारकर चला गया. यह छूना भी नहीं था, बल्कि थप्पड़ जैसा था. मैं उस समय बच्ची थी और मुझे वो दर्द याद है.'
उन्होंने आगे बताया कि इन अनुभवों ने उनके बड़े होने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित किया. साथ ही उनकी मां ने उन्हें बाहर की दुनिया के लिए कैसे तैयार करने की कोशिश की. पार्वती ने कहा, 'मेरी मां मुझे सड़क पर चलना सिखाती थीं. विंडो शॉपिंग मत करना. आदमियों के हाथों पर नजर रखो. कल्पना करो ऐसी स्थिति जहां एक मां को अपनी बच्ची को ये सब सिखाना पड़ता है. साथ ही फ्लैशिंग. कितनी बार मैंने मुड़कर देखा कि किसी आदमी अपना मुंडू (धोती) ऊपर करके... अपना अंग दिखा रहा है. उस समय मुझे पता ही नहीं था कि क्या हो रहा है. बहुत बाद में जाकर जब वापस सोचती हूं तो समझ आता है कि इन अनुभवों से हमारे शरीर पर कितना असर पड़ा है.'
पार्वती न सिर्फ अपनी एक्टिंग के लिए ही नहीं बल्कि जेंडर, सेफ्टी और कंसेंट जैसे मुद्दों पर अपनी मुखर राय के लिए भी जानी जाती है. सालों से उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की शानदार फिल्मों में काम किया है. इसमें 'टेक ऑफ', 'Uyire', 'करीब करीब सिंगल', 'चार्ली', 'Maryan' और 'बैंगलोर डेज' जैसी फिल्में शामिल हैं.

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