
'हम धमकियां बर्दाश्त नहीं करेंगे...', ट्रंप की वार्निंग पर बोले ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान
AajTak
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने अपने परमाणु प्रोग्राम और उसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों और धमकियों पर बात की है. उन्होंने कहा है कि यह दावा करना कि ईरान का परमाणु प्रोग्राम खत्म हो चुका है, महज एक भ्रम है.
ईरान पर इजरायली हमले के बाद इस्लामिक गणराज्य के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पहली बार टीवी इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के परमाणु प्रोग्राम को समाप्त करने की कोई भी बात महज एक भ्रम है. पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर कोई भी बातचीत दोनों पक्षों के लिए बराबरी के आधार पर होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा है कि ईरान किसी भी धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा.
ईरानी राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी बुधवार को कतर के ब्रॉडकास्टर अलजजीरा टीवी नेटवर्क के साथ इंटरव्यू में कही. ईरान के परमाणु प्रोग्राम को लेकर ही इजरायल ने 13 जून को उस पर हमला कर दिया था. दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक युद्ध चला. युद्ध रुकने से दो दिन पहले अमेरिका भी युद्ध में शामिल हो गया और उसने यूरेनियम संवर्धन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ईरान के तीन ठिकानों पर बमबारी की थी.
अमेरिका और इजरायल ने दावा किया कि उनके हमलों का मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था. ईरानी अधिकारियों ने इस आरोप का पुरजोर खंडन करते हुए कहा है कि इस्लामी गणराज्य ने कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की और न ही कभी करेगा. ईरान का कहना है कि उसके इस्लामिक मूल्य ऐसे हथियार रखने की इजाजत नहीं देते.
अलजजीरा से बात करते हुए पेजेश्कियान ने कहा, 'ट्रंप का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए और हम इसे स्वीकार करते हैं क्योंकि हम खुद परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहते. यह हमारी राजनीतिक, धार्मिक, मानवीय और रणनीतिक स्थिति है कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते.'
उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर अपने परमाणु प्रोग्राम और यूरेनियम संवर्धन को जारी रखना चाहता है.
उन्होंने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि ईरान का परमाणु प्रोग्राम फोर्डो, इस्फहान और नतांज के तीन परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हवाई हमलों के कारण समाप्त हो गया है.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

ईरान से अमेरिका-इजरायल की लड़ाई की आंच आज और भड़क गई. अपने सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने बीती रात से खाड़ी देशों में कई अहम तेल और गैस के ठिकानों पर हमला किया है. इन हमलों का असर ये है कि आज भारत के समय से दोपहर 3 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 118 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया था. इसका असर शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है. जहां शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आयी वहीं सोने-चांदी की कीमतें भी टूट गईं. भारत के शेयर बाजार से आज 12 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति साफ हो गई है. सवाल ये है कि क्या पश्चिम एशिया में अब युद्ध का रुख पूरी दुनिया को चपेट में ले चुका है ? इस बीच पहली बार 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमले के खिलाफ बयान जारी किया है. तो उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख बरकरार रखने के बावजूद ईरानी गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से पल्ला झाड़ा है.

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि आज ईरान पर अमेरिका अटैक का सबसे बड़ा पैकेज लॉन्च करने जा रहा है. जंग की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे उद्देश्य कभी बदले नहीं हैं और ये जंग राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छानुसार खत्म होगा. आज ही ईरान ने अपने स्टैंड को बताते हुए कहा था कि अभी उसका बदला पूरा नहीं हुआ है.

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे निर्णायक और संभवतः सबसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है. आज डोवर एयरफोर्स बेस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन छह अमेरिकी नायकों को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने एक विमान हादसे में अपनी जान गंवाई लेकिन इस शोक के बीच, वॉशिंगटन के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जो पूरी दुनिया को दहला सकती है. रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब ईरान में 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' यानी थल सेना उतारने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है.

मैं श्वेता सिंह सीधे युद्ध भूमि से आपको महायुद्ध के बीसवें दिन की खबर बता रही हूं. कल ईरान की गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद लगातार चार खाड़ी देश के ऑयल-गैस डिपो-रिफाइनरी पर बड़ा हमला ईरान ने कर दिया है. ईरान ने सऊदी अरामको और यूएई के टर्मिनल के अलावा कतर के सबसे बड़े गैस टू लिक्वड प्लांट रास लफान पर मिसाइल हमला कर दिया. कतर के इस प्लांट से दुनिया को 20 से 25 प्रतिशत गैस की सप्लाई होती है. वहीं सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है.

अमेरिकी अधिकारियों के वॉशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर कुछ अनजान ड्रोन देखे जाने बाद वहां हड़कंप मच गया है. इसी बेस पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं. अभी तक ये पता नहीं लग पाया है कि ये ड्रोन कहां से आए थे. इसके बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. इस पर व्हाइट हाउस में एक बैठक भी हुई है, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई है कि इन हालातों से कैसे निपटा जाए.







