
सैफुल्ला कसूरी की साजिश, आसिफ फौजी-सुलेमान-अबु तल्हा की कायराना हरकत... पहलगाम में PAK की संलिप्तता के 7 सबूत
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सैफुल्ला कसूरी की साजिश और पाक आतंकियों की करतूत से पहलगाम हमला हुआ. जानिए कैसे आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा ने इस हमले को अंजाम दिया और भारत के पास PAK की संलिप्तता के 7 बड़े सबूत हैं.
Pahalgam Baisaran Valley Terror Attack Investigation: पहलगाम की जिस बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने हमला किया, उस जगह पर एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं था. यही वजह है कि अब जांच एजेसियां चश्मदीदों के बयानों के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ा रही हैं. खबर ये भी है कि पहलगाम में जहां पर्यटकों की सबसे ज्यादा भीड़ हुआ करती थी, वहां पर सीआरपीएफ की दो कंपनियां तैनात रहती थीं. लेकिन कुछ महीने पहले ही सीआरपीएफ की उन दो कंपनियों में से एक को किसी दूसरी जगह पर तैनात कर दिया गया.
NIA और फॉरेंसिक टीम ने जुटाए सबूत पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल की दोपहर करीब तीन बजे आतंकवादियों ने 26 सैलानियों की जान ली थी. उस जगह पर उस दोपहर की वो खौफनाक निशानियां भी मौजूद थीं. कारतूस के खाली खोखे भी जहां तहां पड़े साफ नजर आ रहे थे. फिर पूरी तरह से उस जगह को सील कर दिया गया और वहां मीडिया की एंट्री पर भी रोक लगा दी गई थी. चूंकि ये एक क्राइम सीन था, लिहाजा एनआईए और फॉरेंसिंक की टीमें वहां से तमाम सबूत हासिल करने की कोशिश में जुटी थीं.
एक घंटे में पहुंची थी CRPF की क्विक एक्शन टीम जिस जगह ये हमला हुआ, वहां से सबसे करीब में मौजूद सीआरपीएफ की 116 बटालिन की क्विक एक्शन टीम को भी मौका-ए-वारदात पर पहुंचने में करीब एक घंटा लग गया. दरअसल, जिस जगह हमला हुआ वहां तक गाड़ी जा ही नहीं सकती. या तो वो पैदल का रास्ता है या फिर घोड़े से जा सकते हैं. यही वजह है कि जब तक क्विक एक्शन टीम मौके पर पहुंची, तब तक आतंकवादी जंगलों में घुस कर गायब हो चुके थे.
चश्मदीदों के बयान पर ही टिकी है पूरी जांच हमलावर आतंकवादियों में से जिन तीन आतंकवादी की जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्केच जारी की है, उन तीनों के स्केच हमले वाले दिन मौके पर मौजूद कुल 42 चश्मदीदों के बयान के बाद बनाए गए थे. असल में जहां पर ये हमला हुआ वहां एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं था. लिहाज़ा, अब एनआईए की पूरी जांच चश्मदीदों के बयान पर ही टिकी है. चश्मदीदों के बताए हुलिए के आधार पर तैयार इन स्केच की जब जांच की गई तो तीनों की शिनाख्त आसिफ फौजी, अबू तल्हा और आदिल हुसैन ठकेर के तौर पर हुई. आसिफ फौजी का कोड नेम मूसा है. जबकि अबू तल्हा का आसिफ. ये दोनों पाकिस्तानी हैं, जबकि आदिल लोकल यानी कश्मीर घाटी के अनंतनाग डिस्ट्रिक्ट के बिजबेहरा का रहने वाला है.
लोकल आतंकी के घर को बम से उड़ाया इसके अलावा हमले में शामिल जिन दो और आतंकवादियों की शिनाख्त हुई है, उनमें से एक का नाम सुलेमान शाह कोड नेम यूनुस और दूसरे का आसिफ शेख है. सुलेमान शाह पाकिस्तान का रहने वाला है जबकि आसिफ शेख कश्मीर के त्राल का रहने वाला है. अनंतनाग डिस्ट्रिक्ट के बिजबेहरा के रहने वाले आदिल थोकर उर्फ आदिल गुरी का घर शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने बम से उड़ा दिया. आदिल पर हमले की साजिश बुनने और उसे अंजाम देने में पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद करने का इल्ज़ाम है. आदिल की पहचान होते ही शुक्रवार को सुरक्षा बल उसके घर पहुंचे और फिर उसके घर को बम से उड़ा दिया गया.
पश्तू और कश्मीरी में बात कर रहे थे आतंकी आदिल 2018 में अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए वैध तरीके से पाकिस्तान गया था. पाकिस्तान जाने के बाद उसने टीआरएफ के कैंप में ट्रेनिंग ली थी. ट्रेनिंग लेने के बाद 2024 में वो पास घाटी लौट आया. पहलगाम हमले के कुछ चश्मदीदों ने बताया था कि कुछ आतंकी आपस में पश्तू भाषा में बातचीत कर रहे थे, जबकि दो लोग कश्मीरी जुबान में. इसी के बाद आदिल और आसिफ की पहचान हो पाई. आदिल की बहन ने बताया कि वो घर से चला गया था नहीं पता कहां गया.

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