
सेम सेक्स मैरिज के खिलाफ देशभर की बार काउंसिल, सुप्रीम कोर्ट को भेजा प्रस्ताव
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देश में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है. याचिकाकर्ता विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के प्रावधानों की मांग कर रहे हैं, ताकि शादी को 'पुरुष और महिला' के बजाय 'पति-पत्नी' के रूप में पढ़ा जा सके. इस बीच, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की संयुक्त बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया है, इसमें विधिज्ञ परिषद की चिंताओं से अवगत कराया गया है.
सुप्रीम कोर्ट में सेम सेक्स मैरिज के मामले में सुनवाई चल रही है. इस बीच, देशभर के बार काउंसिल भी समलैंगिक विवाह के विचार के विरोध में हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी भारतीय विधिज्ञ परिषद की ओर से सभी राज्यों की विधिज्ञ परिषद की संयुक्त बैठक में इस बाबत प्रस्ताव पारित कर सुप्रीम कोर्ट को भेजा गया, इसमें समलैंगिक विवाह को लेकर विधिज्ञ परिषद की चिंताओं से कोर्ट को अवगत कराया गया है.
इसके अलावा वकीलों और उनके परिजन को संकट को स्थिति में मुआवजा और संरक्षण के लिए कानून की जरूरत का प्रस्ताव पारित किया गया. बैठक में सभी राज्यों को बार काउंसिल के प्रतिनिधि मौजूद थे. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि सभी राज्य परिषदों के साथ बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया है. बैठक में सर्वसम्मति से राय बनी है कि समलैंगिक विवाह का मुद्दा संवेदनशील है. इसके मद्देनजर विविध सामाजिक-धार्मिक पृष्ठभूमि के हितधारकों को ध्यान में रखते हुए यह सलाह दी जाती है कि यह सक्षम विधायिका इन विभिन्न सामाजिक, धार्मिक समूहों के साथ विस्तृत परामर्श प्रक्रिया के बाद निर्णय ले.
हमारी संस्कृति के खिलाफ है समलैंगिक विवाह
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि देश के सामाजिक-धार्मिक ढांचे को देखते हुए हमने सोचा कि यह समलैंगिक विवाह का विचार हमारी संस्कृति के खिलाफ है. इस तरह के फैसले अदालतों द्वारा नहीं लिए जाएंगे. इस तरह के कदम कानून की प्रक्रिया से आने चाहिए.
सेम सेक्स मैरिजः क्या होता है स्पेशल मैरिज एक्ट, पर्सनल लॉ को केंद्र सरकार क्यों बता रही है खतरा
भारतीय विधिज्ञ परिषद यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 4 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है. यह निकाय भारत में कानूनी अभ्यास यानी लॉ प्रैक्टिस और कानूनी शिक्षा लॉ एजुकेशन को नियंत्रित और नियमित करती है. देशभर के बार एसोसिएशन के वकील इसके सदस्यों का चुनाव करते हैं. सभी सदस्य फिर अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव करते हैं. इस तरह यह परिषद भारतीय बार का प्रतिनिधित्व करती हैं.

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