
'सुकेश चंद्रशेखर ने खुद को कानून सचिव बताया, कारोबारी से करोड़ों ठगे,' CBI की चार्जशीट
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सीबीआई ने 27 मई 2020 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया था और चेन्नई पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली थी. चार्जशीट के अनुसार, सुकेश ने दिल्ली निवासी संजय जैन के साथ मिलकर डिजिटल डिवाइस का उपयोग करके कथित रूप से ठगी की साजिश रची थी. सुकेश जब अक्टूबर 2019 में हिरासत में पैरोल पर था, तब उसने ठगी को अंजाम दिया था.
महाठग सुकेश चंद्रशेखर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. सीबीआई ने सुकेश के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इसमें सुकेश पर आरोप है कि उसने खुद को कानून सचिव के रूप में बताकर एक व्यवसायी को झांसे में लिया और करोड़ों की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है. तमिलनाडु की एक अदालत में शुक्रवार को दायर आरोपपत्र में एजेंसी ने एक और व्यक्ति के साथ सुकेश को आरोपी बनाया है. सुकेश हाल ही में अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज को 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के गिफ्ट देने के लिए सुर्खियों में आया था.
बता दें कि सीबीआई ने 27 मई 2020 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया था और चेन्नई पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली थी. चार्जशीट के अनुसार, सुकेश ने दिल्ली निवासी संजय जैन के साथ मिलकर डिजिटल डिवाइस का उपयोग करके कथित रूप से ठगी की साजिश रची थी. सुकेश जब अक्टूबर 2019 में हिरासत में पैरोल पर था, तब उसने ठगी को अंजाम दिया था. उसने खुद को केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर कॉल की और धोखाधड़ी की थी. सुकेश ने स्पूफिंग टेक्नोलॉजी के जरिए विभिन्न लोगों को फोन किया था. ये सभी लोगों के खिलाफ विभिन्न जांच एजेंसियों कार्रवाई कर रही हैं और आपराधिक केसों में फंसे हैं. सुकेश ने इन सभी को केस से हटाने का झांसा दिया था.
केसों को निपटाने की आड़ में वसूली करता था
सीबीआई ने कहा कि सुकेश ने इन लोगों के केसों को निपटाने की आड़ में उनसे रिश्वत के रूप में बड़ी मात्रा में उगाही की थी और एकत्र किए गए धन का अपने निजी इस्तेमाल के लिए दुरुपयोग किया था. दिल्ली के पंजाबी बाग निवासी अन्य आरोपी सुकेश के नियमित संपर्क में थे और वकीलों की व्यवस्था करके उनके पैरोल केसों को निपटाकर कानूनी मामलों को संभालते थे. आयकर विभाग ने पहले अक्टूबर 2019 के दौरान वरदैयापालेम, जिला तिरुपति (AP) में मंदिर वाले एक संगठन समेत विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों के परिसरों पर छापे मारे थे.
लैंडलाइन नंबर्स के जरिए गुमराह करता था सुकेश
सुकेश ने खुद को तत्कालीन विधि सचिव, भारत सरकार के रूप में परिचय देकर संगठन के संचालन को संभालने वाले लोगों में से एक से संपर्क किया और कथित तौर पर उन पर 7.50 करोड़ रुपये का भुगतान करने का दबाव डाला. उसने संगठन को बढ़ावा देने वाले समूह के प्रतिनिधियों को 'स्पूफ्ड कॉल' किए थे, जिसमें कॉलिंग नंबरों को उच्च सरकारी अधिकारियों के लैंडलाइन नंबर के रूप में दिखाया गया था. सुकेश ने विदेशी नंबर भी हासिल किए थे और उनका इस्तेमाल मुंबई से 2 करोड़ रुपये वसूलने के लिए किया था.

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