
सीरिया के हमा शहर पर विद्रोहियों का कब्जा, गोलीबारी कर मनाया जश्न... अब राजधानी की तरफ कूच की तैयारी!
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Syria-Rebels War: सीरिया वही देश है, जहां खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) ने अपने जड़ें जमाई थीं. अब एक बार फिर वैसा ही खतरा मंडरा रहा है. गुरुवार को सीरियाई विद्रोहियों ने हमा शहर पर कब्जा जमा लिया.
Syria-Rebels War: सीरिया में हमा पर कब्जे के लिए विद्रोही लड़ाके पिछले 3 दिनों से सेना के साथ लड़ रहे थे. सेना ने आरोप लगाया कि विद्रोहियों ने डिफेंस लाइन को तोड़ने के लिए आत्मघाती हमले किए थे. इस दौरान विद्रोहियों से लड़ते हुए कई सैनिक मारे गए हैं. हमा सीरिया का चौथा सबसे बड़ा शहर है. साल 2011 में सीरिया में शुरू हुए सिविल वॉर के दौरान भी हमा पर विद्रोहियों का कब्जा नहीं हो पाया था. तब भी ये शहर सरकारी नियंत्रण में था. ऐसे में वहां इस बार विद्रोहियों का कब्जा उनके लिए बड़ी जीत है.
सीरिया वही देश है, जहां खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) ने अपने जड़ें जमाई थीं. अब एक बार फिर वैसा ही खतरा मंडरा रहा है. गुरुवार को सीरियाई विद्रोहियों ने हमा शहर पर कब्जा जमा लिया. महज हफ्ते भर के भीतर बिजली की रफ्तार से विद्रोहियों ने सीरिया के दो बड़े शहरों से राष्ट्रपति असद की सेना को खदेड़ दिया है. पहले अलेप्पो और फिर चौथे सबसे बड़े शहर हमा में विद्रोहियों ने अपनी जीत का जश्न मनाया.
सीरिया में दो बड़े शहरों पर विद्रोहियों का कब्जा हो चुका है और अब वो राजधानी दमिश्क की तरफ बढ़ रहे हैं. उन्हें रोकने के लिए हाइवे को बम से उड़ा दिया गया है. सीरिया के एक और बड़े शहर हमा पर विद्रोही गुट हयात तहरीर अल शाम यानी HTS का कब्जा हो गया है. उसके लड़ाके अब सीरिया के अहम शहर होम्स की तरफ बढ़ रहे हैं. उन्होंने होम्स के कुछ इलाकों पर कब्जा भी कर लिया है. होम्स पर कब्जा करने के बाद वो राजधानी दमिश्क की तरफ बढ़ेंगे.
धार्मिक नारों के बीच ऑटोमैटिक राइफलों से निकलती गोलियों की आवाज़ हर तरफ गूंज रही थी. गोलियों की आवाज सुनकर घरों से निकले लोग भी विद्रोहियों के जश्न में शरीक हो गए. विद्रोहियों ने हमा में हाफ़िज़ अल-असद की मूर्ति भी गिरा दी. हाफिज मौजूदा राष्ट्रपति बशर अल असद के पिता थे और साल 1982 में उन्होंने हमा नरसंहार को अंजाम दिया था. जिसके तहत शहर में लगभग 30,000 लोगों की हत्या कर दी गई थी.
उस नरसंहार को असद के खिलाफ सुन्नियों के सीरियाई मुस्लिम ब्रदरहुड के विद्रोह के बाद अंजाम दिया गया था. हाफिज की मूर्ति गिराने के साथ ही विद्रोही जीत का जश्न मना रहे हैं लेकिन सीरियाई सेना कह रही है कि उसके लिए ये कोई झटका नहीं है. उसके मुताबिक, उसने सोच-समझ कर कदम पीछे खींचा है. सीरियाई सेना शहर के बाहर फिर से तैनात हो रही है. उसका मकसद शहरी युद्ध से बचना है ताकि बेकसूर लोगों का खून ना बहे.
बीते 13 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब विद्रोही राष्ट्रपति असद के खिलाफ इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. वो असद जिन्हें रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ ही ईरान का समर्थन भी हासिल है. रूस ने असद के समर्थन में विद्रोहियों पर हवाई बमबारी भी की. लेकिन ये बमबारी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकीय.

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