
साइबर क्राइम के मामलों में कमी आई, पर फिर भी भारत को हर महीने 1300 से 1500 करोड़ का चूना लगा रहे हैं साइबर फ्रॉड, MHA का दावा
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I4C विंग के सूत्रों के के मुताबिक भारत को निशाना बनाने वाले साइबर फ्राड के ज्यादातर मामले दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से संचालित हो रहे हैं. I4C के अनुसार, इस साल जनवरी से जून 2025 तक के पहले 6 महीनों में ऑनलाइन धोखाधड़ी के कारण लगभग साढ़े 8 हजार करोड़ का नुकसान हुआ. हालांकि, इस साल साइबर फ्रॉड से होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आई है.
गृह मंत्रालय (MHA) के तहत भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) से जुड़े सूत्रों ने खुलासा किया कि भारत को निशाना बनाने वाले ज्यादातर साइबर फ्रॉड दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड से संचालित हो रहे हैं. I4C से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल साइबर फ्रॉड के मामलों में कमी आई है.
I4C के अनुसार, इस साल जनवरी से जून 2025 तक के पहले 6 महीनों में ऑनलाइन धोखाधड़ी के कारण लगभग साढ़े 8 हजार करोड़ का नुकसान हुआ, जिसमें से आधे से ज्यादा फ्रॉड मामले म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड से जुड़े नेटवर्क संचालित हो रहे थे. I4C विंग के सूत्रों के मुताबिक, जनवरी से जून 2025 तक हर महीने करीब 1300 से 1500 करोड़ का साइबर फ्रॉड हुआ है.
साइबर फ्रॉड की घटनाओं में आई कमी
MHA की साइबर विंग के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में साइबर फ्रॉड की घटनाओं और आर्थिक नुकसान में कमी देखी गई है. पिछले साल 2024 में हर महीने औसतन 2200 करोड़ रुपये का नुकसान साइबर फ्रॉड के कारण हो रहा था. इस साल ये आंकड़ा कम होकर 1300-1500 करोड़ रुपये प्रति माह तक आ गया है.
भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार, ये साइबर अपराध अक्सर कंबोडिया थाईलैंड वियतनाम और म्यांमार के कई सिक्योर इलाके से संचालित होते हैं. इन ठिकानों को कथित रूप से चीनी ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित किया जाता है.
I4C ने बताया कि इन साइबर अपराधों में भारतीय नागरिकों को साइबर स्लेवरी के लिए मजबूर करने की कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं.

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