सबसे कम उम्र की PM सना मरीन की पार्टी चुनाव हारी, फिनलैंड में अब किसकी बनेगी सरकार?
AajTak
फिनलैंड संसदीय चुनाव के परिणामों का रविवार देर रात ऐलान हुआ. जिसमें ओर्पो की पार्टी को 20.8 प्रतिशत वोट के साथ 48 सीटें मिलीं. रिक्का पुर्रा के नेतृत्व वाली लोकलुभावन फिन्स को 20.0 प्रतिशत वोट मिले और उसके खाते में 46 सीटें गईं, जबकि प्रधानमंत्री मरीन की पार्टी को सिर्फ 19.9 प्रतिशत वोट मिले और उन्हें 43 सीटों पर जीत मिली.
फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन को बड़ा झटका लगा है. कारण, उनकी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी रविवार को आर्थिक चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने वाली केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी से चुनाव हार गई. दरअसल, 53 वर्षीय पेटेरी ओर्पो के नेतृत्व में राष्ट्रीय गठबंधन पार्टी ने संसदीय चुनाव में सबसे अधिक वोट हासिल किए. इसके बाद दक्षिणपंथी फिन्स पार्टी दूसरे स्थान पर रही, जबकि सना मरीन की पार्टी को सबसे कम सीटें मिली हैं और वह तीसरे स्थान पर है. हालांकि 200 सीटों वाले निकाय में कोई भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है.
रविवार देर रात को फिनलैंड संसदीय चुनाव के परिणामों का ऐलान हुआ. जिसमें ओर्पो की पार्टी को 20.8 प्रतिशत वोट के साथ 48 सीटें मिलीं. रिक्का पुर्रा के नेतृत्व वाली लोकलुभावन फिन्स को 20.0 प्रतिशत वोट मिले और उनके खाते में 46 सीटें गईं. जबकि दुनिया की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री कही जाने वाली मरीन की पार्टी को 19.9 प्रतिशत वोट मिले और उन्हें 43 सीटों पर जीत मिली.
बता दें कि मरीन के लिए ये बहुत बड़ा झटका है. देश में उनकी लोकप्रियता के बावजूद पार्टी को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा. इसके पीछे का मुख्य कारण, ओर्पो द्वारा फिनलैंड पर बढ़ते कर्ज के मुद्दे को उठाए जाना माना जा रहा है. फिलहाल ओर्पो के लिए भी गठबंधन की सरकार बना बड़ी चुनौती होगी.
ओर्पो के पास सरकार बनाने का मौका
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओर्पो के पास फिन्स या सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी के साथ गठबंधन की सरकार बनाने का विकल्प है. लेकिन इसके बाद भी उन्हें सरकार बनाने के लिए अन्य छोटे दलों के समर्थन की आवश्यकता होगी. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने चुनावी अभियान के दौरान सभी प्रमुख दलों को नाराज न करने का ध्यान रखा गया था, जबकि मरीन ने फिन्स को नस्लवादी कहकर उसकी आलोचना की थी.
पहली बार सत्ता में काबिज हो सकेंगे ओर्पो?

बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी के चुनाव से पहले अमेरिकी राजदूत की जमात-ए-इस्लामी प्रमुख डॉ शफीकुर रहमान से मुलाकात ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. इस बातचीत का फोकस चुनाव, राज्य सुधार, अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोहिंग्या संकट पर रहा. अमेरिका की जमात से बढ़ती नजदीकियों को आगामी चुनाव में उसके संभावित बड़े रोल से जोड़कर देखा जा रहा है.

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल में एक संघीय अधिकारी की गोली से नर्स एलेक्स जेफ्री प्रेटी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से अमेरिका में पुलिस और फेडरल एजेंसियों की कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों में जाने वालों और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस बीच वॉशिंगटन में प्रेटी की याद में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. देखें अमेरिका से जुड़ी 10 बड़ी खबरें.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.








