
सऊदी महिलाओं के लिए जीते जी नरक जैसे हैं केयर होम, कइयों को मौत के बाद ही मिलता है छुटकारा
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सऊदी अरब में कथित बिगड़ी हुई लड़कियों के लिए पुनर्वास केंद्र के नाम पर ऐसे सेंटर्स चल रहे हैं जहां लड़कियों को बेहद ही बुरी स्थिति में रखा जाता है. लड़कियों को साप्ताहिक रूप से कोड़े मारे जाते हैं और जबरदस्ती धार्मिक शिक्षा दी जाती है. उन्हें सबके सामने बिना गलती मारा-पीटा जाता है.
'अगर आपके साथ यौन हिंसा होती है और आपका पिता या फिर भाई आपको प्रेग्नेंट करता है तो परिवार की इज्जत बचाने के लिए आपको दार अल-रिया में भेज दिया जाता है...' ये कहना है सऊदी अरब की एक महिला याहिया का, जिसके पिता ने 13 साल की उम्र से ही उसका यौन शोषण शुरू कर दिया था. पिता ने धमकी दी कि अगर याहिया ने उनकी बात नहीं मानी तो वो उसे पुनर्वास केंद्र, जिन्हें दार अल-रिया कहा जाता है, भेज देंगे.
दार अल-रिया सेंटर्स को सऊदी अरब में केयर होम के नाम पर चलाया जा रहा है. सऊदी अरब की महिलाएं इन होम्स को जेल कहती हैं 'जहां रहना नर्क में रहने से भी बदतर है.'
याहिया अब 38 साल की है और वो सऊदी अरब से भागकर निर्वासित जीवन बिता रही हैं. जब वो 13 साल की थी तब उनके माता-पिता ने उन्हें दार अल-रिया भेजने की धमकी दी थी. वो कहती हैं, 'मेरे पिता ने कहा कि अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी, उनकी शारीरिक मांगों को पूरा नहीं किया तो वो मुझे दार अल-रिया भेज देंगे.'
याहिया और उनके जैसी सैकड़ों लड़कियों की यह कहानी सऊदी अरब की तरफ से पेंट की जा रही महिलाओं की उस तस्वीर पर पानी फेरती है जिसमें उन्हें हर तरह के अधिकार दिए जा रहे हैं.
सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) जब 2017 में सत्ता में आए तब उन्होंने महिला सुधारों के क्षेत्र में बहुत काम किया. देश की कट्टर इस्लामिक छवि को सुधारने के लिए उन्होंने महिलाओं को कई अधिकार दिए जिसमें घर से निकलकर बाहर काम करने, अकेले घर से बाहर जाने, ड्राइविंग करने, म्यूजिक इवेंट्स में हिस्सा लेने और स्पोर्ट्स इवेंट्स में जाने की इजाजत शामिल थी.
सऊदी अरब जहां एक तरफ 2034 में फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी करने जा रहा है और अपनी एक सुधारवादी छवि पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जो महिलाएं अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की आवाज उठा रही है या फिर अधिकारों की मांग कर रही है, उन्हें हाउस अरेस्ट और जेलों में रखकर प्रताड़ित किया जा रहा है.

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