
संस्कृत को तीसरी भाषा बनाने का प्रस्ताव, कर्नाटक पैनल ने पाइथागोरस प्रमेय और ग्रेविटी की खोज पर किया ये दावा
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Karnataka Panel: नई शिक्ष नीति पर कर्नाटक पैनल के अध्यक्ष मदन गोपाल ने कहा 'पायथागोरस प्रमेय, न्यूटन के सिर पर सेब गिरने आदि जैसी फर्जी खबरें कैसे बनाई और प्रचारित की जा रही हैं'.
गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की खोज आइजैक न्यूटन ने सन 1666 में की थी, उनके सिर पर एक सेब गिरा जिसके बाद ग्रेविटी की खोज हुई. शायद आपने भी यही पढ़ा और सुना होगा लेकिन नई शिक्षा नीति (NEP) लागू करने के लिए कर्नाटक की टास्क फोर्स के अध्यक्ष मदन गोपाल का कहना है कि न्यूटन द्वारा ग्रविटी की खोज और पाइथागोरस प्रमेय के बारे में गलत पढ़ाया और बताया जा रहा है. उन्होंने इसे 'फेक न्यूज' कहा है.
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने नई शिक्षा नीति के करिकुलम फ्रेमवर्क के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस पैनल के अध्यक्ष मदन गोपाल ने नए एनईपी स्कूल सिलेबस के लिए कई प्रस्ताव रखें हैं. इनमें से एक में कहा गया है कि छात्रों को यह सवाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि 'पायथागोरस प्रमेय, न्यूटन के सिर पर सेब गिरने आदि जैसी फर्जी खबरें कैसे बनाई और प्रचारित की जा रही हैं'.
वैदिक गणित में हैं पाइथागोरस प्रमेय और गुरुत्वाकर्षण की जड़ें उन्होंने कहा, 'गुरुत्वाकर्षण और पाइथागोरस की जड़ें वैदिक गणित में हैं. यह एक भारतीय केंद्रित दृष्टिकोण है. इसके बारे में गूगल पर काफी जानकारी है. उदाहरण के लिए, यह माना जाता है कि बौधायन (भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र व श्रौतसूत्र के रचयिता) ने बौद्ध ग्रंथों में पाइथागोरस प्रमेय लिखी है, यह एक दृष्टिकोण है. आप इससे सहमत हो भी सकते हैं और नहीं भी.'
संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने का प्रस्ताव रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य ने स्कूली शिक्षा पर पोजिशन पेपर तैयार करने के लिए 26 समितियों का गठन किया था. इनमें भारत के ज्ञान के साथ दूसरों के ज्ञान को भी शामिल किया गया है. कर्नाटक ने सभी स्कूली बच्चों को संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने और मनुस्मृति और भूत-सांख्य और कटापयादि-सांख्य पद्धति जैसी प्राचीन संख्यात्मक प्रणालियों को सिलेबस में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. पेपर में लिखा है कि हजारों भाषाओं की भूमि पर कम से कम तीन भाषाओं को पढ़ाया जाना चाहिए - क्षेत्रीय भाषा, अंग्रेजी और एक भारतीय भाषा, विशेष रूप से संस्कृत.
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पोजिशन पेपर की समीक्षा के लिए हुई बैठकों में सदस्यों के बीच तीखी बहस भी हुई. आपत्तियों को खारिज करते हुए मदन गोपाल ने कहा, 'यह पेपर एक प्रतिष्ठित आईआईटी प्रोफेसर की अध्यक्षता में तैयार किया गया है. इसे राज्य सरकार ने जांचा और स्वीकार किया है. समिति की अध्यक्षता आईआईटी बीएचयू, वाराणसी के केवी रामनाथन ने की है.
पेपर में बताया कि कई स्मृति साहित्य (Smrti literature) 'अधूरेपन और उनके लोकाचार और सामग्री की अधूरी और खराब समझ के कारण अस्पष्ट हो गए हैं या उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. उदाहरण के लिए, मनुस्मृति (Manusmirti) में सार्वजनिक और सामाजिक भलाई के लिए आदर्श होने के बावजूद, यह इस हद तक विवादास्पद हो गया है कि हमारे समाज का एक वर्ग इसे गलत मानता है.'

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