
'संविधान की प्रस्तावना से सोशलिज्म और सेक्युलरिज्म शब्द हटाने का कोई इरादा नहीं', सरकार ने सदन में दिया जवाब
AajTak
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखित जवाब में कहा कि भले ही कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा या बहस हो रही हो, लेकिन सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है.
केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्षता' शब्दों को हटाने या इन पर दोबारा विचार करने की वर्तमान में कोई योजना या मंशा नहीं है. ये दोनों शब्द आपातकाल के दौरान 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़े गए थे.
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखित जवाब में कहा कि भले ही कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा या बहस हो रही हो, लेकिन सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है.
सरकार ने जवाब में क्या कहा? उन्होंने कहा, 'सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि प्रस्तावना से 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्षता' शब्दों को हटाने या उन पर पुनर्विचार करने की फिलहाल कोई योजना या इरादा नहीं है. प्रस्तावना में संशोधन जैसे मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श और सर्वसम्मति की आवश्यकता होती है, लेकिन अभी तक इस दिशा में सरकार ने कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है.'
कोर्ट ने भी खारिज कर दी थीं याचिकाएं मेघवाल ने यह भी उल्लेख किया कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिनमें 1976 के संशोधन को चुनौती दी गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार प्रस्तावना तक भी विस्तारित होता है.
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय संदर्भ में 'समाजवाद' का अर्थ एक कल्याणकारी राज्य से है, जो निजी क्षेत्र के विकास में कोई बाधा नहीं बनता. वहीं 'धर्मनिरपेक्षता' संविधान की मूल संरचना का अभिन्न हिस्सा है.

सरकार ने राज्यसभा में बताया कि निजाम के 173 बहुमूल्य गहने 1995 से भारतीय रिजर्व बैंक के वॉल्ट में कड़ी सुरक्षा में रखे गए हैं. संस्कृति मंत्रालय ने इनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विरासत महत्व को स्वीकार किया है. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इन गहनों को हैदराबाद में स्थायी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए स्थानांतरित करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

Delhi Weather: दिल्ली में फरवरी की शुरुआत मौसम में बदलाव के साथ होगी. जिसमें हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिलेगा. IMD के अनुसार, 31 जनवरी से 3 फरवरी तक न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19-21 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. जनवरी में असामान्य बारिश के बाद फरवरी की शुरुआत भी ठंडी और गीली रहने की संभावना है.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?






