
शुभेंदु अधिकारी का राम मंदिर आंदोलन ममता बनर्जी को रोक पाएगा क्या?
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पश्चिम बंगाल में रामनवमी शोभायात्रा की उपलब्धि ये रही कि ममता बनर्जी को राजभवन की तरफ से तारीफ सुनने को मिली है, लेकिन बीजेपी ने सरकार पर हमला बोला है - हां, शुभेंदु अधिकारी के सामने कुछ कर दिखाने का मौका जरूर है.
रामनवमी का मौका पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनावों से पहले आमने सामने आने का बहाना दे गया. ये मौका बड़े राजनीतिक इवेंट के तौर पर आया था - और अपनी तरह से दोनो पक्षों ने भरपूर फायदा उठाने की कोशिश की. पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं.
रामनवमी को लेकर पश्चिम बंगाल में काफी दिनों से जबरदस्त सियासत चल रही थी, जिसकी वजह से पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तो तनाव का माहौल भी बन गया था. बीजेपी और टीएमसी दोनों दलों के नेता लगातार एक दूसरे को घेर भी रहे थे.
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने रामनवमी को जहां छठ और दुर्गापूजा का एक्सटेंशन बनाने की कोशिश की, विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तो अपने इलाके में अयोध्या जैसा भव्य राम मंदिर बनाने का पहले से ही ऐलान कर डाला था, और रामनवमी के मौके पर शिलान्यास भी कर दिया है.
रामनवमी की शोभायात्रा भी हाई कोर्ट के आदेश पर निकाली गई. हिंदू संगठन हर विधानसभा में शोभायात्रा निकालने पर अड़े हुए थे, जिन्हें बीजेपी का समर्थन हासिल था, लेकिन ममता बनर्जी और उनके साथी कह रहे थे कि ये दंगे कराना चाहते हैं.
लेकिन, टीएमसी की तरफ से भी शोभायात्रा की तैयारी चल रही थी. टीएमसी के हिंदी प्रकोष्ठ के नेता का कहना था, हम जिस तरह दुर्गा पूजा और छठ पूजा मनाते हैं, उसी तरह रामनवमी भी मना रहे हैं.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को हावड़ा में 6 अप्रैल को तय रूट पर ही जुलूस निकालने की, लेकिन सशर्त परमिशन दी थी. जुलूस में किसी भी व्यक्ति के हथियार लेकर आने पर पूरी तरह पाबंदी थी. तनावपूर्ण माहौल को देखते हुे पश्चिम बंगाल सरकार ने भी 9 अप्रैल तक पुलिस वालों की छुटि्टयां पहले ही रद्द कर चुकी हैं

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