
वीजा रैकेट, हनी ट्रैप और मनी ट्रेल... ऐसे खुली पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारी की पोल, मलेरकोटला में दो गिरफ्तार
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पंजाब पुलिस ने हाल ही में एक वित्तीय नेटवर्क और जासूसी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग (पीएचसी) के एक कर्मचारी के इशारे पर चलाया जाता था. खुफिया सूचनाओं के आधार पर किए गए इस ऑपरेशन में मलेरकोटला के दो निवासियों को गिरफ्तार किया गया है.
पाकिस्तान उच्चायोग (PHC) में तैनात एक अधिकारी को संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में महिला समेत दो लोगों को हिरासत में लिया गया है. पीएचसी अधिकारी दानिश की पहचान हैंडलर के रूप में हुई. मलेरकोटला के एसएसपी (SSP) गगन अजीत सिंह ने कहा कि पुलिस उसकी तलाश कर रही है. पंजाब के DGP गौरव यादव ने पुष्टि कर दी है कि आरोपियों को गोपनीय जानकारी के लिए पैसा मिलता था.
भारत को पाक उच्चायुक्त के कर्मचारी की कार्यप्रणाली के बारे में विशेष जानकारी मिली है, जो अब अवांछित व्यक्ति है. दरअसल, पंजाब पुलिस ने हाल ही में एक वित्तीय नेटवर्क और जासूसी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग (PHC) के एक कर्मचारी के इशारे पर चलाया जाता था. खुफिया सूचनाओं के आधार पर किए गए इस ऑपरेशन में मलेरकोटला के दो निवासियों को गिरफ्तार किया गया है. जिनकी पहचान विधवा महिला गज़ाला (31) और यामीन मोहम्मद के तौर पर हुई है.
आरोप है कि ये दोनों पीएचसी अधिकारी दानिश के लिए ऑपरेटिव के रूप में काम करते हैं. गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. जांच से पता चलता है कि पीएचसी कर्मचारी दानिश ने न केवल वीजा सुविधा के बहाने भारत में संपर्क बनाए, बल्कि जासूसी प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए संवेदनशील जानकारी और अवैध धन के प्रवाह को व्यवस्थित करने के लिए इन संबंधों का फायदा भी उठाया.
खुफिया सूत्रों के अनुसार, मलेरकोटला के मोहल्ला पोरियन की स्थानीय निवासी गज़ाला पहली बार 27 फरवरी 2025 को आयोग में वीजा आवेदन के लिए गई थी, जिसके दौरान PHC कर्मचारी दानिश के संपर्क में आई. दानिश के रूप में पहचाने जाने वाले अधिकारी ने कथित तौर पर शादी के झूठे वादे के तहत उसके साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल किया, बाद में टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म पर बातचीत की और जानकारी साझा की.
गजाला के कबूलनामे के अनुसार, दानिश ने उसे डिजिटल भुगतान (फ़ोनपे और जीपे) के माध्यम से पैसे भेजना शुरू कर दिया, जिसमें 7 मार्च को ₹10,000 और 23 मार्च को ₹20,000 शामिल थे. निर्देशों के तहत, गुज़ाला ने इस राशि का एक हिस्सा विशिष्ट छोटे लेनदेन में बेनाम लोगों को दिया. माना जाता है कि वे अंजान लोग एक व्यापक स्लीपर सेल या सहायता नेटवर्क का हिस्सा थे. PHC अधिकारी ने गुज़ाला के फ़ोन में हैप्पीनेस उपनाम से अपना नंबर सेव किया था.
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, वित्तीय लेन-देन, हालांकि हानिरहित प्रतीत होते हैं, लेकिन वे गुप्त संचालन और सूचना लीक की सुविधा प्रदान करने वाले माइक्रो-भुगतान की एक बड़ी प्रणाली का हिस्सा थे.

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