
रूसी गोलीबारी में यूक्रेन को भारी नुकसान, गोदामों में रखे 3 लाख टन अनाज बर्बाद
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रूस की गोलीबारी में यूक्रेन के लगभग 300,000 टन अनाज बर्बाद हो गए. उप कृषि मंत्री तारास वायसोस्की ने ये जानकारी दी.
रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध अभी जारी है. ये कब खत्म होगा, इसकी परिणिति क्या होगी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता. रूस की ओर से लगातार हो रही गोलीबारी और टैंक के जरिए हमले से यूक्रेन को काफी नुकसान पहुंचा है. रूस की ओर से हुई गोलीबारी में यूक्रेन के लगभग 300,000 टन अनाज बर्बाद हो गए. आधिकारिक रूप से बताया गया कि मायकोलायिव में रूसी गोलाबारी से गोदामों में रखे 300,000 टन तक अनाज नष्ट हो गए. उप कृषि मंत्री तारास वायसोस्की ने ये जानकारी दी.ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन के रक्षा प्रमुख का किया धन्यवाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन के रक्षा प्रमुख के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठक के बाद कीव के समर्थन के लिए यूके को धन्यवाद दिया है. कीव की दो दिवसीय अघोषित यात्रा के दौरान ब्रिटिश रक्षा सचिव बेन वालेस ने ज़ेलेंस्की और साथ ही उनके यूक्रेनी समकक्ष ओलेक्सी रेज़निकोव से मुलाकात की.
ज़ेलेंस्की की ओर से शुक्रवार को कहा गया, राज्य के प्रमुख ने रूसी आक्रमण के खिलाफ हमारी लड़ाई में ब्रिटिश सरकार द्वारा यूक्रेन के प्रभावी समर्थन के लिए मंत्री को धन्यवाद दिया. युद्ध ने दिखाया कि हमारे असली दोस्त और साझेदार कौन हैं.
यूक्रेन को डर है कि लंबे युद्ध से पश्चिम देशों की दिलचस्पी खत्म हो सकती है. यूक्रेन के रोजाना 100-200 सैनिकों की मौत हो रही है. एक यूक्रेनी क्षेत्रीय बिजली कंपनी के सीईओ ने रूसी सैनिकों पर दक्षिणी मायकोलायिव क्षेत्र में जानबूझकर बिजली के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने का आरोप लगाया है. जून की शुरुआत के बाद से रूसी गोलाबारी में 14 ओवरहेड बिजली लाइन और 377 ट्रांसफार्मर सबस्टेशन नष्ट हो गए हैं.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








