
परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहा मिडिल-ईस्ट संघर्ष? इजरायली शहर डिमोना पर ईरानी हमले ने बढ़ाई चिंता
AajTak
ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. डिमोना जैसे संवेदनशील न्यूक्लियर साइट पर हमले ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन अटैक से मध्य-पूर्व में तबाही का दायरा फैलता जा रहा है. बढ़ते तनाव के बीच अब परमाणु युद्ध की आशंका गहराने लगी है.
मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध में ईरान लगातार अपनी ताकत दिखा रहा है. हर गुजरते दिन उसके हमले और ज्यादा घातक होते जा रहे हैं. इजरायल के शहर-तेल अवीव, अराद और डिमोना लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों की जद में हैं. सायरन की आवाज, धुएं के गुबार और तबाही के मंजर अब आम हो चुके हैं.
ईरान ने हाल ही में इजरायल के डिमोना शहर को निशाना बनाया, जहां उसका बेहद संवेदनशील न्यूक्लियर रिएक्टर स्थित है. दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इस इलाके में भी ईरानी मिसाइलों की पहुंच ने सबको चौंका दिया है. इजरायल आयरन डोम (Iron Dome) और एरो (Arrow) जैसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम के बावजूद ईरान के कई मिसाइल हमले नहीं रोक पाया. अराद और उत्तरी इजरायल के कई इलाकों में रिहायशी इमारतें बुरी तरह तबाह हो गईं. ड्रोन और ग्राउंड विजुअल्स में आग, मलबा और घायल लोगों की तस्वीरें सामने आई हैं.
ईरान का दावा है कि इन हमलों में इजरायल को भारी नुकसान हुआ है. सिर्फ इजरायल ही नहीं, ईरान ने खाड़ी देशों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया जैसे सैन्य अड्डे पर हमला कर ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन किया है. ईरान से डिएगो गार्सिया आइलैंड की दूरी करीब 4000 किलोमीटर है. हालांकि, ईरान की दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असफल रहीं.
दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे कि ईरान की सैन्य ताकत खत्म हो चुकी है. लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान की असली ताकत उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो लंबी दूरी तक सटीक वार कर सकती हैं. यही कारण है कि इजरायल और अमेरिका के लगातार हमलों और दावों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर होती नहीं दिख रही.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस युद्ध को देश के अस्तित्व की लड़ाई बताया है. उनके बयान के बाद इजरायल ने भी ईरान के ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं. स्थिति अब बेहद संवेदनशील हो गई है. न्यूक्लियर साइट्स पर हमले ने इस संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह युद्ध अब परमाणु जंग की ओर बढ़ रहा है? लगातार बढ़ते हमले, नए-नए टारगेट और बढ़ता तनाव यह संकेत दे रहे हैं कि अगर हालात नहीं संभले, तो यह संघर्ष एक बड़े महायुद्ध में बदल सकता है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को तीन हफ्ते पूरे हो चुके हैं. अमेरिका और इजरायल ईरान को नेस्तनाबूद करने के बयान जारी कर रहे हैं. वहीं, ईरान और आक्रामक होकर अमेरिकी बेसों पर हमले कर रहा है. उसने 4000 किलोमीटर दूर अमेरिका और ब्रिटेन के डिएगो गार्सिया पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी हैं. देखें युद्धभूमि से 'वॉर रूम'.

ईरान जंग के बीच इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' का पूरी दुनिया में चर्चा है. ये एजेंसी दुश्मन के देश में घुसकर उसकी सोच, ताकत और भविष्य को खत्म कर देती है. ईरान युद्ध में पहली मिसाइल फायर होने से काफी पहले सी 'मोसाद' ने इसकी तैयारी रच ली थी. आखिर 'मोसाद' कितना अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय है? देखें ये शो.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा. कई टॉप कमांडर्स के मारे जाने के बाद भी ईरान, अमेरिका और इजरायल पर जबरदस्त पलटवार कर रहा है. ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ना तो ईरान के तेवर कमजोर पड़ रहे और ना ही NATO और दुनिया के तमाम देश ट्रंप का साथ दे रहे. सवाल है क्या ईरान को हराना ट्रंप के लिए 'नाक की लड़ाई' बन गई है? देखें हल्ला बोल.










