
'युद्ध रुका तो माइंस हटाने पर सोचेंगे...', डोनाल्ड ट्रंप की मदद की अपील पर जापान का आया जवाब
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जापान ने कहा है कि अगर इजरयाल-अमेरिका का ईरान के साथ जो युद्ध जल रहा है, उसपर अगर पूरी तरह से विराम लगता है तो वह होर्मुज के रास्ते से माइंस हटाने का सोचेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो दिन पहले ही जापान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात के बाद जापान की ओर से यह बयान जारी किया गया है.
जंग के दौरान समुद्र में कई जगह बारूदी सुरंगें बिछा दी जाती हैं. इन्हें नेवल माइंस कहते हैं. ये पानी के अंदर छुपी होती हैं और जहाज इनसे टकराए तो तबाह हो जाए. जंग खत्म होने के बाद इन माइंस को ढूंढकर हटाना पड़ता है. इसी काम को माइंसवीपिंग कहते हैं. यह बहुत खतरनाक और तकनीकी काम है जो सिर्फ कुछ देशों की नौसेनाएं कर सकती हैं. जापान उनमें से एक है.
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने रविवार को एक टीवी कार्यक्रम में कहा, "अगर पूरी तरह सीजफायर हो जाए और होर्मुज में नेवल माइंस रास्ते में रुकावट बन रही हों तो माइंसवीपिंग पर विचार किया जा सकता है." लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि यह अभी सिर्फ एक "काल्पनिक बात" है. जापान का अभी कोई तत्काल इरादा नहीं है.
जापान के लिए होर्मुज इतना जरूरी क्यों है?
जापान के पास खुद का तेल नहीं है. वो अपनी जरूरत का 90 फीसदी तेल बाहर से मंगाता है और उसका ज्यादातर हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है. यानी अगर होर्मुज बंद रहा तो जापान की पूरी अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ सकती है. पेट्रोल, बिजली, कारखाने सब कुछ. इसीलिए जापान इस मामले में बहुत सतर्क है और हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है.
जापान का संविधान आड़े आता है
यहां एक बड़ी पेचीदगी है. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान ने एक शांतिप्रिय संविधान बनाया जिसमें लिखा है कि जापान की फौज सिर्फ देश की रक्षा के लिए है, बाहर जाकर लड़ने के लिए नहीं.

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