
राजस्थान में छोटी पार्टियां भाजपा-कांग्रेस को दे रहीं कड़ी चुनौती, 2018 में 14 सीटों पर किया था कब्जा
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राजस्थान में चल रहे चुनाव में छोटी पार्टियां त्रिकोणीय मुकाबला बना रही हैं और कुछ सीटों पर सीधे टक्कर दे रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी का पूर्वी राजस्थान में दबदबा है, तो आरएलपी का पश्चिमी राजस्थान और शेखावाटी में दबदबा है.
राजस्थान में चल रहे चुनावी घमासान में भाजपा कांग्रेस के अलावा छोटी पार्टियों में भी दमखम भर रही है. 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा, आरएलपी, बीटीपी, पीसीएम और आरएलडी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे. तो राजस्थान की 14 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी. ऐसे में इस बार भी छोटी पार्टियों भाजपा, कांग्रेस को बड़ी चुनौती दे रही है. ऐसे में देखना होगा कि जनता इस बार भाजपा कांग्रेस के अलावा किस पार्टी को ज्यादा पसंद करती है.
राजस्थान में चल रहे चुनाव में छोटी पार्टियां त्रिकोणीय मुकाबला बना रही हैं और कुछ सीटों पर सीधे टक्कर दे रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी का पूर्वी राजस्थान में दबदबा है, तो आरएलपी का पश्चिमी राजस्थान और शेखावाटी में दबदबा है. दक्षिण राजस्थान में बीटीपी कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना रही है. दिल्ली और पंजाब में सरकार बनने के बाद आम आदमी पार्टी ने भी राजस्थान चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारे हैं.
राजस्थान के चुनाव में 12 नए दल चुनाव लड़ रहे हैं. इस बार छोटे-बड़े कुल 58 राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतरे हैं. ऐसे में राजनीतिक दलों और निर्दलियों को मिलाकर 199 विधानसभा सीटों पर कुल 1862 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है.
इस बार कौन-कौन सी पार्टियों ने उतरे प्रत्याशी
इस बार विधानसभा चुनाव में बसपा ने 185, AAP ने 88, आरएलपी ने 78, बीटीपी ने 12, एएसपी ने 47, बीएपी ने 21, सीसीएस ने 17, आरएलडी ने 1, जेजेपी ने 25 और निर्दलीय ने 730 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं.
2018 में क्या थे हालत?

वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग के बाद पैदा हुए हालातों पर प्रधानमंत्री लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच उन्होंने कहा कि अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है. इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है. इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है.












