
राजनाथ-खड़गे में 3 बार बात, कॉल बैक का इंतजार और ऐसे बिगड़ गई स्पीकर पद पर बात... छिड़ी शर्तों की पॉलिटिक्स पर जंग!
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राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के पास राजनाथ सिंह का कॉल आया था. उन्होंने कहा था कि स्पीकर पद पर विपक्ष को समर्थन करना चाहिए और एक राय बनानी चाहिए. हमने कहा कि हम स्पीकर का समर्थन करेंगे, लेकिन डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को मिलना चाहिए. राजनाथ सिंह ने कहा था कि मल्लिकार्जुन खड़गे को कॉल बैक करेंगे. लेकिन वो कॉल अभी तक नहीं आया. मोदी कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं. अगर डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को मिलेगा, तब ही हम समर्थन करेंगे.
18वें लोकसभा के स्पीकर पद को लेकर सियासत गरमा गई है. देश के इतिहास में पहली बार लोकसभा स्पीकर को लेकर चुनाव होगा. एनडीए की ओर से ओम बिरला जबकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक की ओर से के. सुरेश ने स्पीकर पद के लिए नामांकन भर दिया है.
दरअसल विपक्ष डिप्टी स्पीकर के पद पर अड़ गया था. विपक्ष ने पहले ही कहा था कि अगर डिप्टी स्पीकर का पद नहीं मिलता है तो वो भी स्पीकर पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे.
शुरुआत में खबर थी कि लोकसभा स्पीकर को लेकर एनडीए और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है और ओम बिरला एक बार फिर स्पीकर पद संभालेंगे. लेकिन संसद पहुंचने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान से सियासत गरमा गई.
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के पास राजनाथ सिंह का कॉल आया था. उन्होंने कहा था कि स्पीकर पद पर विपक्ष को समर्थन करना चाहिए और एक राय बनानी चाहिए. हमने कहा कि हम स्पीकर का समर्थन करेंगे, लेकिन डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को मिलना चाहिए. राजनाथ सिंह ने कहा था कि मल्लिकार्जुन खड़गे को कॉल बैक करेंगे. लेकिन वो कॉल अभी तक नहीं आया. मोदी कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं. अगर डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को मिलेगा, तब ही हम समर्थन करेंगे.
राहुल के इस बयान के बाद स्पीकर पद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच असहमति साफ नजर आई. इस बीच ओम बिरला ने स्पीकर पद के लिए नामांकन कर दिया. उधर, इंडिया ब्लॉक ने के. सुरेश को स्पीकर पद के लिए उम्मीदवार बनाया और उन्होंने भी नामांकन किया.
इससे पहले एनडीए की तरफ से स्पीकर चुनाव के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश की गई और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं से बातचीत की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अलग-अलग नेताओं से मुलाकात की और फोन पर बातचीत की. सूत्रों का कहना था कि स्पीकर के नाम पर विपक्षी दलों के साथ सहमति बनती तो डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष दिया जा सकता है. हालांकि, विपक्ष का कहना है कि डिप्टी स्पीकर पद नहीं दिया जा रहा था, इसलिए बात बिगड़ गई.

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