
'ये बातों से नहीं, जूतों से मानने वाले हैं...', पाकिस्तान में शहबाज सरकार के खिलाफ सड़कों पर हजारों लोग, भारी फोर्स की तैनाती
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इस प्रदर्शन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर पाकिस्तान के कड़े नियंत्रण को और उजागर कर दिया है. शौकत नवाज मीर और अन्य अवामी एक्शन कमेटी (AAC) नेता इस्लामाबाद पर दशकों से उपेक्षा, भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और स्वच्छ जल जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने का आरोप लगाते रहे हैं.
पाकिस्तान आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक और निर्यातक है, ये बात पूरी दुनिया जान चुकी है. पाकिस्तान की अवाम भी अपने हुक्मरानों से तंग आ चुकी है और देश आंतरिक अस्थिरता से गुजर रहा है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को हाल के दिनों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें हजारों लोग शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए. इस प्रोटेस्ट को दबाने के लिए सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया और भारी तादाद में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.
पीओके के कई इलाकों में प्रदर्शन
अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के बंद और चक्का जाम के आह्वान पर मीरपुर, कोटली, रावलकोट, नीलम घाटी, केरन और अन्य जिलों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं. अधिकारियों ने आधी रात से ही सुरक्षाबलों की तैनाती और इंटरनेट सेवा बंद करके लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश की थी. एक भाषण में AAC नेता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'ये बातों से नहीं, जूतों से मानने वाले हैं.'
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नागरिक समाज गठबंधन एएसी ने राजनीतिक हाशिये पर होने और लंबे वक्त से चली आ रही आर्थिक उपेक्षा शिकायतों को उठाकर स्थानीय लोगों के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की है. कमेटी की तरफ से एक 38 पॉइंट एजेंडा भी तैयार किया गया है, जिसमें उनकी प्रमुख मांगें दर्ज है.
'अधिकार दो, नहीं तो विरोध होगा'

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