
'यह भारत ही तय करेगा...', चुनावों को कवर करने की अनुमति ना मिलने के ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार के दावे पर अमेरिका
AajTak
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि भारत सरकार अपनी वीजा पॉलिसी पर बात कर सकती है. यह कोई ऐसी बात नहीं है, जो मुझसे की जाए.
अमेरिका (America) ने एक ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार के भारतीय आम चुनावों को कवर करने की अनुमति नहीं दिए जाने के दावे पर हुए सवाल पर जवाब दिया है. एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पूछने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने फटकार लगाई और कहा कि यह भारत निर्धारित करता है कि वह किन गैर-नागरिकों को प्रवेश की अनुमति देता है.
ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार अवनी डायस (Avani Dias) को वीजा रिन्यू के लिए इनकार किए जाने के आरोपों पर एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि भारत सरकार अपनी वीजा पॉलिसी पर बात कर सकती है. यह कोई ऐसी बात नहीं है, जो मुझसे की जाए. मैं यहां से अपना विचार व्यक्त करने जा रहा हूं. उन्होंने इस दौरान लोकतंत्र के ढांचे में आजाद पत्रकारिता की भूमिका पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर, हम दुनिया भर के देशों के साथ लोकतंत्र के ढांचे में स्वतंत्र प्रेस की भूमिका के बारे में स्पष्ट हैं. यही वजह है कि हम यहां आते हैं और नियमित रूप से सवाल लेते हैं लेकिन मैं भारत में अधिकारियों को बोलने दूंगा.
यह भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार का दावा- लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन बताकर चुनाव कवर करने से रोका, भारत सरकार ने आरोप को नकारा
क्या है ऑस्ट्रेलिया की पत्रकार से जुड़ा वीजा मामला?
पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया की एक पत्रकार अवनी डायस (Avani Dias) ने दावा किया कि भारत में उन्हें चुनाव कवर करने की मंजूरी नहीं दी गई, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. लेकिन पत्रकार के इस दावे को भारत सरकार से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने गलत और भ्रामक बताया है.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हवाई हमला किया है. इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले जारी है. इजरायली हमलों से लगातार ईरान में तबाही मची हुई है. ईरान की राजधानी तेहरान इन हमलों से सबसे ज्यादा ग्रसित है, जहां लोग इन हमलों के बीच डर में रहने को मजबूर है. तेहरान के की इलाकों को इस हमले में निशाना बनाया गया.

ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है. व्हाइट हाुस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने युद्धविराम पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका बातचीत कर सकता है, लेकिन युद्धविराम पर कोई विचार नहीं है. साथ ही येभी कहा कि जब सामने वालो पक्ष को अमेरिका पूरी तरह से नष्ट कर रहा है तो युद्धविराम नहीं होगा.

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने तुर्की और ओमान में हुए हमलों में अपना हाथ होने से साफ इनकार कर दिया है और इसे इजरायल की साजिश बताया है. ईद और नए साल के मौके पर दिए संदेश में उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले एक साल में तीन बड़ी जंग जीती हैं. उन्होंने मीडिया को आगाह किया कि वे देश की अंदरूनी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं, क्योंकि इससे दुश्मनों की 'दिमागी जंग' को मदद मिलती है.

खाड़ी देशों में तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. जिसका सीधा असर तेल और गैस पर पड़ रहा है, जिसकी चपेट में पूरी दुनिया आ रही है. इस बीच अमेरिका और इजरायल के हमले का जवाब देने के लिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अपना एक खास हथियार बना लिया है. इस समुद्री गलियारे पर नियंत्रण के जरिए ईरान ने दुनिया के व्यापार को प्रभावित किया है और अब ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है. देखें वीडियो.

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ईसा मसीह और चंगेज खान का उदाहरण देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर समाज अपनी रक्षा नहीं कर पाता, तो यीशु मसीह भी चंगेज खान को नहीं हरा सकते. इस बयान पर ईसाई जगत और ईरान ने तीखी आपत्ति जताई और इसे ईसा मसीह का अपमान बताया. विवाद बढ़ता देख नेतन्याहू ने सफाई दी कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था.

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरानी हैकिंग ग्रुप 'हंडाला' के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके चार डोमेन को सीज कर दिया है. बीते दिनों हंडाला ने अमेरिकी मेडिकल कंपनी स्ट्राइकर पर मैलवेयर हमला किया था और इजरायली अधिकारियों के डेटा को लीक किया था. FBI ने इस कार्रवाई को ईरानी साइबर ऑपरेटरों के लिए चेतावनी बताया है.

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग ठप्प कर दिया है. जहां पहले रोज़ाना 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, अब वहां गिनती सिर्फ 5 जहाजों तक सिमट गई है. इस रास्ते के बंद होने से भारत समेत पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है, क्योंकि सऊदी और यूएई की वैकल्पिक पाइपलाइनों में इतना दम नहीं कि वे होर्मुज की कमी पूरी कर सकें.





