
ययाति, रावण और अमृत का कॉन्सेप्ट... जवान बने रहने और अमरता की अंधी दौड़ पौराणिक काल से जारी है
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वैदिक युग का सबसे चर्चित आशीर्वाद आयुष्मान भव, चिरायु भव और चिरंजीवी भव है, जो आज भी हमारी आशीर्वाद परंपरा में शामिल है. पुराणों में कथा मिलती है कि ब्रह्ना ने जब पहले युगल मनु-शतरूपा को बनाया तो उन्होंने शतरूपा को वरदान दिया कि वह कभी बूढ़ी नहीं होगी और युवा रहेगी. हमेशा ही कौमार्य का अनुभव करेगी.
अभिनेत्री शेफाली जरीवाला के निधन की आजकल चर्चा है. मौत की वजह बना कार्डिएक अरेस्ट का मामला जब और खुलकर सामने आया तो इस दुनिया से उनकी रुखसती और अधिक चर्चा में आ गई. सामने आया है कि शेफाली एंटी एजिंग पिल्स और इंजेक्शन लेती थीं. हालांकि ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है कि ये दवाइयां ही उनके लिए खतरनाक साबित हुईं, लेकिन उनकी अप्रत्याशित मौत ने पॉप की दुनिया के बादशाह रहे माइकल जैक्सन की मौत की भी याद दिला दी, जिन्होंने जवां और सुंदर दिखने के लिए अपने चेहरे की कई बार प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी, उनका जीवन दवाइयों और इंजेक्शन पर निर्भर था और जब मौत हुई तब उनकी नाक की हड्डी वाली जगह खाली पाई गई.
ऐसा कहा जाता है कि माइकल जैक्सन भी एंटी एंजिंग के केमिकल रिएक्शन का शिकार हुए थे.
सच में ये जीवन कितना अप्रत्याशित है ना. महाभारत में यक्ष युधिष्ठिर से पूछते हैं, 'किम आश्चर्यम्?' सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? युधिष्ठिर जवाब देते हैं कि मनुष्य हर दिन किसी न किसी को मरते हुए देखता-सुनता है, लेकिन फिर भी यह सोचता है कि मेरी मृत्यु नहीं हो, मैं नहीं मर रहा, या फिर मैं नहीं मरूंगा और ये भी कि कुछ ऐसा हो जाए कि मैं न मरूं. मनुष्य मृत्यु से डरता है जो कि अटल सत्य है.
'काश कुछ ऐसा हो जाए कि मेरी मृत्यु न हो' मनुष्य के भीतर पनपे इसी विचार की पहली सीढ़ी है कि वह कभी बूढ़ा न हो. युधिष्ठिर के इसी जवाब में दुनिया भर में चल रही तमाम तरह की रिसर्च का सार छिपा हुआ है. एंटी एजिंग... यानी कुछ ऐसा हो जाए कि मनुष्य पर बढ़ती उम्र का असर न दिखे.
हालांकि ऐसा नहीं है कि ये कोई इधर 10-20 साल की बात है या बीती कुछ सदी से ही इस पर काम होना शुरू हुआ है. मनुष्य जबसे पैदा हुआ लगभग तभी से उसने मौत को हराने के तरीके सोचना शुरू कर दिया था. ये आदिमानवों के सर्वाइवल के लिए जरूरी भी था और बहुत लंबा समय खुद को जिंदा बचाए रखने की चुनौती और संघर्ष में खप गया. इस पर जब विजय मिली, तब जाकर मनुष्य ने इसकी एक और सीढ़ी पर कदम रखा और वह अपनी उम्र के ही थम जाने पर विचार करने लगा.

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