
यमुना में जल प्रदूषण से दिल्ली पर भी असर, गंगाजल से चलने वाले प्लांट प्रभावित
AajTak
यमुना नदी में प्रदूषण के स्तर ने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जो दिल्ली वालों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है. अब दिवाली जैसे खास त्योहार के समय दिल्ली वालों को पानी की परेशानी होगी.
यमुना नदी में प्रदूषण के स्तर ने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति को काफी प्रभावित किया है, जो दिल्ली वालों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है. अब दिवाली जैसे खास त्योहार के समय दिल्ली वालों को पानी की परेशानी होगी.
आम तौर पर, भागीरथी और सोनिया विहार जल उपचार संयंत्र, जिनकी संयुक्त क्षमता 250 मिलियन गैलन प्रति दिन (MGD) है- सोनिया विहार से 140 MGD और भागीरथी से 110 MGD - गंगा से पानी की आपूर्ति करते हैं. दुर्भाग्य से, यूपी सिंचाई विभाग और यूपी जल निगम द्वारा किए जा रहे रखरखाव और मरम्मत कार्यों के कारण 21 अक्टूबर, 2024 से गंगा जल की आपूर्ति रोक दी गई है.
इन इलाकों में पानी की समस्य़ा आकस्मिक उपाय के रूप में, इन संयंत्रों ने 31 अक्टूबर, 2024 के बाद आपूर्ति फिर से शुरू होने तक कच्चे पानी के लिए यमुना नदी की ओर रुख किया है. हालांकि, 1.5 पीपीएम से अधिक उच्च अमोनिया स्तर एक बड़ी चुनौती है, जिससे पानी आपूर्ति की क्षमता में 30% तक की कमी आयी है.
इसने राजधानी के कई प्रमुख क्षेत्रों को सीधे प्रभावित किया है, जिसमें ग्रेटर कैलाश, वसंत कुंज, मालवीय नगर, लाजपत नगर और पंचशील पार्क जैसे समृद्ध दक्षिण दिल्ली के इलाके शामिल हैं.
लोगों को पानी का संरक्षण करने की सलाह इसके अलावा, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली और एनडीएमसी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पानी की भारी कमी है प्रभावित क्षेत्रों में गोकुलपुरी, शाहदरा, मयूर विहार, पटपड़गंज, विश्वकर्मा पार्क और कई अन्य शामिल हैं. निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि के दौरान पानी का संरक्षण करें और इसके उपयोग की सावधानीपूर्वक योजना बनाएं.

पाकिस्तान ने रात के अंधेरे में अफगानिस्तान पर एक बार फिर हमला बोला है. पाकिस्तान ने ये एयरस्ट्राइक अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक नशा मुक्त केंद्र अस्पताल पर किया है. इस हमले में अबतक 400 से ज्यादा मासूमों की मौत हो गई है, वहीं 250 से ज्यादा घायल बताए जा रहे है. वहीं अस्पताल पर हमले के आरोप से पाकिस्तान ने इनकार किया है.

वृंदावन में बंदरों की शरारतें अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौती बन गई हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तीन दिवसीय दौरे से पहले चश्मा छीनने वाले बंदरों को काबू में रखने के लिए अनोखा उपाय किया गया है. वन्यजीव कानूनों के चलते असली लंगूरों की तैनाती संभव नहीं होने पर अब लंगूरों के कटआउट और विशेष टीमों के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.











