
म्यांमार: सेना के खिलाफ प्रदर्शन जारी, 17 फरवरी तक कस्टडी में रहेंगी आंग सान सू की
AajTak
म्यांमार की सरकार से सेना द्वारा बेदखल कर दी गईं आंग सान सू की को अब 17 फरवरी तक रिमांड में ही रहना होगा.
म्यांमार की सरकार से सेना द्वारा बेदखल कर दी गईं आंग सान सू की को अब 17 फरवरी तक रिमांड में ही रहना होगा. म्यांमार में इस वक्त सबकुछ सेना ने अपने हाथ में ले लिया है. ऐसे में जब अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में आंग सान सू की को रिमांड में रखा जा रहा है. म्यांमार में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और सू की को रिहा करने की मांग की जा रही है. लेकिन सेना द्वारा रिमांड बढ़ाए जाने के बाद ये तकरार बढ़ सकती है. बता दें कि बीते दिन हजारों की संख्या में इंजीनियर्स ने मार्च निकाला था, जिसमें आंग सान सू की को रिहा करने की मांग की गई थी. यांगोन में भी बीते दिनों जब इंटरनेट बंद कर दिया गया था और सेना ने एक बार फिर सड़कों पर टैंक घुमाने शुरू किए थे, तब भी कुछ संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए थे. सेना ने जब म्यामांर की सत्ता को अपने कब्जे में लिया तो सबसे पहले आंग सान सू की को हिरासत में लिया, साथ ही सरकार के सभी बड़े चेहरों को नजरबंद कर दिया गया. दुनिया के कई बड़े देशों ने म्यामांर के हालात पर चिंता व्यक्त की है और आंग सान सू की को जल्द रिहा करने की मांग की है.
अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








