
मोदी ने लाल किले के प्राचीर से अमेरिका के लिए रेडलाइन और डेडलाइन दोनों ही खींच दी
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लाल किले पर आज पीएम ने जो स्पीच दी उसे यदि आप गौर से सुनेंगे तो पाएंगे कि अमेरिका के लिए उन्होंने कुछ रेडलाइन तय कर दी हैं जिन्हें पार करना अस्वीकार्य है. इसी तरह उन्होंने डेडलाइन (समयबद्ध अपेक्षाएं) भी तैयार किया है.
यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से लाल किले के प्राचीर से देश और दुनिया को हैरान करते रहे हैं पर इस बार की बात अलग थी.क्योंकि इस बार दुनिया के सबसे ताककतवर और अमीर मुल्क को मेसेज देना था. पूरा भारत इसी बात का इंतजार भी कर रहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को आज पीएम मोदी जरूर जवाब देंगे. शायद पीएम भी जनभावनाओं को समझ रहे थे इसलिए उन्होंने अपने स्पीच में पाकिस्तान और अमेरिका के लिए बहुत कुछ ऐसा कहा जो इन देशों को अच्छा नहीं लगा होगा. भारत के खिलाफ ट्रंप की हर नकारात्मकता का जवाब पीएम ने बिना अमेरिका का नाम लिए बहुत सकारात्मक तरीके से दिया.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ को ध्यान में रखते हुए मोदी ने आज बहुत सी ऐसी बातें कीं जो अमेरिका के लिए रेडलाइन और डेडलाइन की तरह हैं. पीएम के भाषण का अगर ठीक ढंग से विश्वेषण करेंगे तो यह साफ दिखेगा कि अमेरिका के लिए उन्होंने कुछ रेडलाइन तय कर दी हैं जिन्हें पार करना अस्वीकार्य है. इसी तरह उन्होंने डेडलाइन (समयबद्ध अपेक्षाएं) भी तैयार किया है. जाहिर है कि ये रेडलाइन और डेडलाइन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, क्षेत्रीय सुरक्षा, और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है.यही कारण है कि 15 अगस्त 2025 का मोदी का लाल किले से दिया गया भाषण भारी राजनीतिक और कूटनीतिक संदेशों के लिए भी वर्षों तक याद किया जाएगा.
1- किसानों और मछुआरों के हितों के रक्षा के लिए दीवार बन जाएंगे , मतलब टैरिफ से डरेंगे नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों को पहली प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी भलाई तथा हितों की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मैं किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए दीवार की तरह खड़ा हूं. इस वक्तव्य ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी नीति या दबाव के आगे वो झुकने वाले नहीं . ये अमेरिका के लिए एक रेडलाइन था कि वो समझ ले कि भारत टैरिफ से डरने वाला नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी ने आज से पहले भी यह बात कही थी कि वह किसानों के लिए व्यक्तिगत राजनीतिक कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं.
2-दाम कम-दम ज्यादा का मंत्र, मतलब अमेरिका के बाहर भी बाजार है
मोदी ने अपने स्पीच में दाम कम-दम ज्यादा का मंत्र दिया. इसका सीधा अर्थ है कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता की प्रतिबद्धता. मोदी ने अपने स्पीच में मेक इन इंडिया, सेमीकंडक्टर मिशन, ईवी आदि के लिए वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने की बात कही, जो स्पष्टतया अमेरिकी टैरिफ और निर्यात बाधाओं का जवाब था. यह मंत्र भारत की आर्थिक और औद्योगिक नीति में आत्मनिर्भरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है.

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