
मेड रखने से लोग डरेंगे? घरेलू कामगारों के वेतन पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, CJI बोले- नतीजे खतरनाक हो सकते हैं
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CJI ने कहा कि यह तर्क देना आसान है कि घरेलू कामगारों के मामले में संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 14, 15 और 16 का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन इसके नतीजों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा. उन्होंने आशंका जताई कि अगर न्यूनतम वेतन तय किया गया तो कई लोग घरेलू कामगार रखना ही बंद कर देंगे और इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं कामगारों को होगा.
घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन तय करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह मुद्दा सिर्फ अधिकारों का नहीं, बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक असर का भी है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि कोर्ट को यह भी देखना होगा कि ऐसे आदेशों के क्या परिणाम होंगे.
CJI ने कहा कि यह तर्क देना आसान है कि घरेलू कामगारों के मामले में संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 14, 15 और 16 का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन इसके नतीजों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा. उन्होंने आशंका जताई कि अगर न्यूनतम वेतन तय किया गया तो कई लोग घरेलू कामगार रखना ही बंद कर देंगे और इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं कामगारों को होगा.
एजेंसियों के शोषण पर CJI की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI ने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि बड़े शहरों में अब घरेलू कामगार सीधे नहीं रखे जाते, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के जरिए काम पर लगाए जाते हैं. उन्होंने कहा, 'मैंने खुद देखा है कि ये एजेंसियां किस तरह शोषण करती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी एक एजेंसी के जरिए एक कैटेगरी के कर्मचारियों को रखा था. एजेंसी ने हमसे 54 हजार रुपये लिए और उस गरीब लड़की को सिर्फ 19 हजार दिए.'
CJI ने कहा कि घरेलू कामगारों को सीधे रखने पर ही कुछ हद तक सुरक्षा और भरोसे का रिश्ता बनता है, लेकिन एजेंसियों के जरिए रखे गए कामगार पूरी तरह शोषण के शिकार होते हैं.
कोर्ट कानून बनाने की भूमिका में नहीं: CJI

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