
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति ने अचानक क्यों छोड़ा देश? संसद ने जताई आपत्ति
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नशीद ने सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से बताया कि वह क्लाइमेट वल्नेरेबल फोरम (CVF) के महासचिव के तौर पर काम शुरू करने के लिए घाना की राजधानी अकरा पहुंच गए हैं. उन्होंने हका कि सीवीएफ का सचिवालय घाना में है और वह अगले कुछ सालों तक घाना मेरा घर रहेगा. हमें इस सेक्टर में निवेश की उम्मीद है ताकि सीवीएफ के सदस्य अपने मकसद में कारगर साबित हो सकें. सीवीएफ की स्थापना 2009 में की गई थी. उस समय नशीद मालदीव के राष्ट्रपति थे.
मालदीव में सियासी उथल-पुथल जारी है. इस बीच खबर है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति नशीद घाना शिफ्ट हो गए हैं. उन्होंने हाल ही में सक्रिय राजनीति से विराम लेने का ऐलान किया था.
नशीद (56) ने सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से बताया कि वह क्लाइमेट वल्नेरेबल फोरम (CVF) के महासचिव के तौर पर काम शुरू करने के लिए घाना की राजधानी अकरा पहुंच गए हैं. उन्होंने कहा कि सीवीएफ का सचिवालय घाना में है और वह अगले कुछ सालों तक घाना मेरा घर रहेगा. हमें इस सेक्टर में निवेश की उम्मीद है ताकि सीवीएफ के सदस्य अपने मकसद में कारगर साबित हो सकें.
नशीद 2008 से 2012 तक मालदीव के राष्ट्रपति थे. वह 2019 से 2023 तक मालदीव की संसद के स्पीकर भी थे. नशीद के घाना शिफ्ट होने के घटनाक्रमों के बीच संसद का कहना है कि वह बिना संसद को सूचित किए अस्थाई तौर पर घाना शिफ्ट हुए हैं.
संसद के संचार निदेशक हसन जियाउ का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि नशीद ने अभी हमें यह नहीं बताया है कि उनकी संसद में किस तरह की जिम्मेदारियों की योजना है.
जियाउ ने कहा कि नशीद ने संसद से लीव के लिए आवेदन भी नहीं किया है और उनके कार्यकाल के बाकी बचे तीन महीनों के लिए उन्हें वेतन मिलना जारी रहेगा. बता दें कि पिछले महीने नशीद ने ऐलान किया था कि वह सीवीएफ के महासचिव के तौर पर अपने जिम्मेदारियां निभाने के लिए सक्रिय राजनीति से थोड़े समय के लिए दूरी बना रहे हैं.
बता दें कि सीवीएफ क्लाइमेट चेंज की दिशा में काम करने वाला संगठन है. इसकी स्थापना 2009 में की गई थी. उस समय नशीद मालदीव के राष्ट्रपति थे.

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