
महिलाओं को टिकट देने में RJD सबसे आगे, NDA-महागठबंधन दोनों ने लगाई वादों की झड़ी... 'आधी आबादी' किसे जिताएगी?
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महिला वोटर्स को लुभाने के लिए पार्टियां बड़े-बड़े वादे तो कर रही हैं, लेकिन टिकट बंटवारे में महिलाओं पर भरोसा कम दिख रहा है. इसके चलते बिहार विधानसभा में महिला प्रतिनिधित्व लगातार घट रहा है.
बिहार विधानसभा चुनाव में महिला वोट बैंक को लुभाने के लिए एनडीए और महागठबंधन के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिल रही है. दोनों गठबंधनों ने महिलाओं को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए कई योजनाओं और वादों की झड़ी लगा दी, लेकिन टिकट बंटवारे में महिला उम्मीदवारों को दी गई हिस्सेदारी ने सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव से पहले नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं लागू कीं. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई, जिसके तहत जीविका दीदियों को स्वरोजगार के लिए 10-10 हजार रुपये की राशि दी गई. अब तक 1.21 करोड़ महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं. वहीं, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने चुनाव से पहले आंगनबाड़ी सेविकाओं और रसोइयों का मानदेय भी बढ़ाया.
दूसरी ओर, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का तोड़ निकालने के लिए महागठबंधन में शामिल राजद के नेता तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और 30 हजार रुपये मासिक वेतन का वादा किया है. उन्होंने इससे पहले बिहार के हर परिवार में एक सरकारी नौकरी का वादा भी किया था.
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