
महाराष्ट्र: सतारा महिला डॉक्टर सुसाइड केस में SIT गठित, SRPF कमांडेंट सौंपी गई जांच की कमान
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23 अक्टूबर को डॉ. संपदा मुंडे ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी. प्रारंभिक जांच में पता चला कि वह पुलिस और राजनीतिक दबाव का सामना कर रही थीं. यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इस प्रकरण में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) को आरोपी बनाया गया है.
महाराष्ट्र के सतारा जिले में महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है. यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इस प्रकरण में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) को आरोपी बनाया गया है.
राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य आरक्षित पुलिस बल (SRPF), पुणे की कमांडेंट तेजस्वी सटपुते को इस जांच की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्हें तुरंत सतारा जाकर जांच का कार्यभार संभालने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.
आदेश के मुताबिक, तेजस्वी सटपुते को सतारा जाकर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) और मामले की जांच कर रहे अधिकारी से विस्तृत जानकारी लेनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि शेष जांच निर्धारित समयसीमा में और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए. साथ ही, उन्हें समय-समय पर जांच की प्रगति रिपोर्ट सीधे पुलिस महानिदेशक के कार्यालय को भेजनी होगी.
सूत्रों के अनुसार, सतारा जिले के फलटन शहर थाने में इस मामले की प्राथमिकी दर्ज की गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 अक्टूबर को डॉ. संपदा मुंडे ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी. प्रारंभिक जांच में पता चला कि वह पुलिस और राजनीतिक दबाव का सामना कर रही थीं. आरोप है कि उन्हें लगातार गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने और फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट देने के लिए मजबूर किया जा रहा था.
इस घटना के बाद से स्थानीय मेडिकल समुदाय में गहरी नाराजगी और आक्रोश है. डॉक्टरों के संगठनों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी. अब SIT के गठन से जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि SIT का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि जांच किसी भी प्रभाव या दबाव से मुक्त रहे. तेजस्वी सटपुते, जो एक वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी मानी जाती हैं, अब इस मामले में सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेंगी.

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